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Central min. foolish statement- दिल्ली की सीमा पर किसान नहीं पाक-चीन के एजेंट

किसानों को खेती के नये कानूनों से कोई दिक्कत नहीं है।

दिल्ली की सीमा पर आंदोलनकारी किसान पिछले 15 दिनाों से कड़कड़ाती सर्दी में घरों को छोड़ कर खुले आसमान में सोने पर मजबूर है। लेकिन सरकार के मंत्री और बीजेपी का सोशल मीडिया विंग इन किसानों को खालिस्तानी बताने से नहीं चूक रहे है। इतना ही नहीं यह भी अफवाह फैलायी जा रही है कि किसानों को विपक्षी राजनीतिक दल बरगला रहे है। किसान पहले पंजाब और हरियाणा में रह कर ही अपना विरोध दर्ज कराते रहे लेकिन केन्द्र सरकार तक उनकी आवाज नहीं पहुंची तो दिल्ली कूच करने की ठानी है। 15 दिनों में किसानों और केन्द्र के बीच 5 बैठकें हुईं लेकिन बेनतीजा रही है। किसानों ने साफ कर दिया है कि वो कानून खत्म होने तक आंदोलन रखेंगे। वो पीछे हटने वाले नहीं हैं। वहीं मोदी सरकार ने यह साफ  कर दिया है कि वो किसी भी सूरत में कानून वापस नहीं लेने वाली है। मोदी सरकार के मंत्रियों ने इतना जरूर कहा कि किसानों की कुछ मांगों पर कानूनों में संशोधन करने को तैयार है। अब हालात और भी ज्यादा गंभीर होते दिख रहे है। किसाने के समर्थन में समाज के हर वर्ग के लोग उतरने लगे है। पंजाब और हरियाणा से आने वाले खिलाड़ी, अध्यापक, समाजसेवी और पूर्व ओलंपियंस ने किसानों के समर्थन में अपना बयान दिया है। इससे सरकार अंदर अंदर सहम गयी है। इसलिये वो उन लोगों पर निशाना साध रही है जो खुलकर किसान आंदोलनों में सहयोग कर रहे हैं।

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