once again bjp
BJP clean sweep opposition in Gen. election. Modi will lead India again

23 मई की शाम तक भारत की राजनीति में एक नया इतिहास रचा गया। मोदी ने साबित कर दिया कि वो ही इतनी शानदार तरीके से वापसी कर सकती है। एक बात तो कि जितने कान्फिडेस से वो दावा कर रहे थे कि आयेगा तो मोदी ही मोदी के सिवा कोई और नही कर सकता है। पिछले एक डेढ़ साल से कांग्रेस समेत सारा विपक्ष मोदी और एनडीए सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा था। लेकिन मोदी तो उनके सारे किये धरे पर पानी ही फेर दिया। जहां कुछ मीडिया हाउस और टीवी चैनल्स मोदीमय थे वहीं कुछ मुट्ठीभर लोग मोदी सरकार को निशाने पर रखे हुए थे। लेकिन ये सारे प्रयास मोदी की रणनीति के आगे नतमस्त हो गये। जितनी शानदार तरीके से मोदी और एनडीए की वापसी हुई है लगता है कि देश में राजनीतिक विपक्ष तो हे ही नहीं।
नेशनल पार्टी के रूप में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल था जो मोदी सरकार का जमकर विरोध कर रहा था। वहीं रीजनल पार्टी के रूप में समाजवादी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने गठबंधन इसलिये किया था कि वो एकजुट होकर मोदी सरकार को कड़ी टक्कर देंगे। लेकिन देश और यूपी के लोगों को मोदी की लफ्फाजी और नाटकीय शैली ही पसंद आयी यही वजह है कि मोदी मैजिक एक बार फिर लोगों के सिर चढ़ कर चला। पूरा का पूरा विपक्ष मोदी शाह की जुगलजोड़ी के आगे टिक नहीं पाया। सपा बसपा के लिये तो अपना वजूद बचाने की लड़ाई थी। सपा के घर के सांसद भी अपनी जीत के लिये एक एक वोट के लिये संघर्ष कर रह हैं।
कांग्रेस की हालत भी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं दिख रही है। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव बनाने के साथ पूर्वांचल का प्रभारी भी बनाया था। वैसे प्रियंका और राहुल ने यूपी मे चुनाव प्रचार करने में पूरा दम लगा दिया। लेकिन उनका यह प्रयास बेकार ही चला गया। प्रियंका के लिये महासचिव की जिम्मेदारी का पहला अनुभव सुखद नहीं रहा ऐसा कहा जा सकता है। कांग्रेस सपा और बसपा के हालात इस चुनाव में और भी ज्यादा खराब हो गये हैं।
कांग्रेस के लिये यूपी से सबसे खराब खबर यह रही कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी ही सीट नहीं बचा पाये। स्मृति ईरानी ने उन्हें हरात हुए यह साबित कर दिया कि यूपी से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। मात्र सोनिया गांधी ही रायबरेली सीट से अपनी सीट जीत सकी है। यह कांग्रेस के लिये सबसे दुखद है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, भाई अक्षय यादव व अन्य रिश्तेदार चुनाव हार गये। इससे साफ जाहिर होता है कि जनता ने सिर्फ पर मोदी पर ही विश्वास जताया है। यह किसी पार्टी का चुनाव नहीं दिखा बल्कि वन मैन शो मोदी का जादू ज्यादा नजर आया है।
इससे ज्यादा हालत तो रालोद की हुई है जिसमे पार्टी अध्यक्ष अजित सिंह और जयंत चौधरी दोनो ही चुनाव हार गये हैं। रालोद का प्रभाव जाट बहुल क्षेत्र में अच्छा बताया जाता था। लेकिन इस बार के चुनावी परिणाम आने से साफ हो गया कि देश में विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं रह गयी है। बसपा को इस चुनाव जरूर राहत मिली है उनके दस उम्मीदवार चुने गये हैं। 2014 के आम चुनाव में बसपा का कोई भी उम्मीदवार सांसद नहीं बन सका था।
चुनाव के आखिरी क्षणों में भाजपा का दामन थामने वाले निरहुआ, प्रवीण निषाद और रविकिशन में से सिर्फ रविकिशन ही चुनाव जीतने में सफल हुए। रामपुर से भाजपा की सीट पर चुनाव लड़ने वाली जया प्रदा आखिरकार हार ही गयीं। उनका प्रचार के दौरान आंसू टपकाना भी वोट दिलाने में सफल नहीं हो सका और सपा नेता आजम खां एक बार फिर सांसद बनने में सफल हुए। हेमा मालिनी व किरण खेर भी जैसे जैसे चुनाव जीत गयी। भाजपा ने इस बार जिस किसी को भी टिकट दिया उसका भाग्य खुल गया। भाजपा का दिल्ली में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन राह सातों सीट पर कमल खिला। इस बार भाजपा ने क्रिकेटर गौतम गंभीर, सूफी पंजाबी गायक हंस राज हंस कोभी टिकट दिया। पहले तो यह लगा कि इन दोनों को टिकट दे कर भाजपा ने अपने पैरौं पर कुल्हाड़ी मार ली है। लेकिन मोदी के नाम पर इनको जनता ने सिर आंखों लेते हुए अपना आशीर्वाद दे ​ही दिया।
इस बार के चुनाव परिणाम यह संकेत दे रहे हैं कि मोदी शाह ने देश की जनता की आंखों पर राष्ट्रवाद और सेना के प्रति प्रेम ही छाया। विरोधियों के उठाये रोजगार, आर्थिक व्यवस्था, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे जनता का विश्वास जीतने में सफल नहीं हुए।

इस बार मोदी फैक्टर उन प्रदेशों भी चला जहां कभी बीजेपी की कोई पहचान नही थी। ओडिशा, वेस्ट बंगाल और अन्य प्रदेशों में भी भाजपा ने अच्दी सफलता प्राप्त की है। प.बंगाल में टीएमसी के गढ़ में भी सेंध लगाने में भाजपा सफल रही है। इसमे मोदी और शाह के योगदान को नहीं अनदेखा किया जा सकता है।

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