पिछले साल सितंबर माह में मी टू मूवमेंट का जिन्न भारतीय मनोरंजन व फिल्म उद्योग से शुरू हुआ। इसकी शुरुआत बाॅलिवुड ऐक्ट्रैस तनुश्री दत्ता ने की। उन्होंने ऐक्टर नाना पाटेकर पर आरोप लगाया था कि लगभग डेढ़-दो दशक पहले एक फिल्म की शूटिंग के सेट पर उनके साथ अश्लील हरकत की थी। उसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ उसमें बाॅलिवुड कलाकार, संगीतकार, गायक, निर्माता निर्देशक समेत अनेक नामीगिरामी हस्तियों के बारे में भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे लगाये। उन्हीं में एक थे 48 साल के फेमस व सफल फिल्म निर्माता अघ्र्य बसु। उन पर एक मशहूर महिला फिल्म निर्माता ने बसु पर यौन शोषण के आरोप लगाये थे तभी से वो डिप्रेशन में चले गये थे। हालात इतने बिगड़ गये कि उन्होंने एक मार्च को अपने फ्लैट में फांसी लगा कर अपनी जान दे दी। पुलिस को घटनास्थल पर कोई भी सुसाइडल नोट नहीं मिला है। पुलिस जानकारों की मानें तो अघ्र्य बसु यौन उत्पीड़न का आरोप लगने से पिछले काफी समय से तनाव में थे। बसु की एक दोस्त ने एक वेबसाइट को दिये इंटरव्यू में बताया कि 2017 में यौन उत्पीड़न के आरोप लगने से बसु काफी तनावग्रस्त हो गये थे। इससे उबरने के लिये उन्होंने परिवार वालों के कहने पर एक मनोचिकित्सक की सलाह भी ली थी। इसके बाद वो तमिल और मराठी फिल्मों की एडिटिंग करने लगे थे। हम लोग जल्द ही अपना एक वेंचर लांच करने जा रहे थे।

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