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ट्रेन की सेकेंड क्लास सीट पर बैठा एक काफी सामान्य परिवार का दिखने वाला सिख किरदार, अपने सामने में बैठी महिला किरदार को कहानियां सुनाता है जहाँ से शुरुआत होती है फ़िल्म लाल सिंह चड्ढा की।
लोगो में परसेप्शन यह फैलाया गया है कि पूरे फ़िल्म में लाल सिंह चड्ढा यानि वो ट्रेन में कहानी सुनाने वाले सिख किरदार ने पंजाबी भाषा मे बात की है जो पब्लिक के समझ के बाहर है।
जबकि वह बोली ही इस पूरे फ़िल्म का पंचिंग प्वाइंट है।
आमिर खान ने जिस दीवानगी से अपनी मासूमियत दिखाई है लाल सिंह चड्ढा में वह देखने लायक है।
सच में! वो मासूम सा ‘सिक्ख किरदार’ , आपको दीवाना बना देगा…
~ अपने अपने किरदारों में- आमिर और करीना
आमिर और करीना ने जिंदगी की कड़वी सच्चाई दिखाई है अपने अपने किरदारों मे…
मम्मी की हर बात मानने वाला लाल सिंह चड्ढा ने एक तरफ मोहब्बत को मज़हब से बढ़कर बताया है तो दूसरी तरफ करीना ने फ़िल्म और मॉडलिंग इंडस्ट्री के काले सच की तस्वीर दिखाई है।
किस तरह से फिल्म इंडस्ट्री को प्रड्यूसर्स के नाम पर अंडरवर्ल्ड माफियाओं के हाथों सौंप दिया गया और एक अभिनेत्री बनने के लिए, एक मॉडल को किन-किन दरबारों से गुजरकर क्या क्या सहना पड़ता है।
यहाँ लाल सिंह चड्ढा को किसी को मारना अर्थात हिंसा अच्छा नही लगता था फिर भी अपने मम्मी के लिए फौजी बने…
दुश्मन को भी गोली लगने पर अपने कंधे पर बैठा कर बचा लाने वाले इस मासूम किरदार ने सबका दिल जीत लिया जब ये डायलॉग आया…
“मम्मी कहती है मजहब की बात करने से देश मे मलेरिया फैल जाता है”
यहाँ मलेरिया से आशय दंगो में व्याप्त धारा 144 और कर्फ्यू के माहौल से था…
~ पॉलिटिकल रूप से संतुष्ट करने के बावजूद देश मे पिट गयी।
सिक्ख धर्म मे केश की क्या महत्वता होती है यह बात एक सिक्ख से बेहतर कोई नहीं समझ सकता..
चौरासी दंगो की क्रूरता को कुछ इस तरीके से दिखाया गया है कि
“एक सिक्ख बच्चे की माँ अपने बच्चे को दंगो की आग से बचाने के लिए अपने हाथों से उसके केश काट दिए”
सोचिए कितना दहशतगर्द माहौल था चौरासी के दंगों का…
साथ ही थोड़ा सा हिस्सा बाबरी विध्वंस का भी दिखाया जिसमे भी गैर राजनीतिक धारणाएं ही दिखी।
“अबकी बार मोदी सरकार” के वाल पेंटिंग भी एक सीन में नजर आया बावजूद यह फ़िल्म राजनीति का शिकार हो गई।
~ आमिर और करीना की कैमेस्ट्री
1983 विश्व कप के फाइनल मैच में विनिंग शॉट के साथ आकाश में आतिशबाजी की धूम मच गयी।
पूरा देश इस अभूतपूर्व मुकाम को हासिल करने की खुशियां मना रहा था जिसके एहसास से परे लाल सिंह चड्ढा (आमिर खान) ने ठीक उसी वक्त रूपा (करीना कपूर) को प्रपोज कर दिया।
“रूपा मेरे साथ व्याह करेगी तू”
कुल तीन बार ये शब्द बोलना पड़ा जीवन मे तब जाकर तीसरी बार मे रूपा ने लाल को अपने सपनों की दुकान दिखाकर मना कर दिया।
रुपा को हीरोइन बनना था, पैसे कमाने थे।
बावजूद लाल सिंह की दिल्लगी इतनी पाक थी रूपा के लिए की हर बार मुसीबत में फंसी रूपा को बचाने के लिए उसकी मदद करने पहुँच जाता था।
फिर चौथी बार प्रपोजल हुआ जिसमें करीना कपूर ने व्याह का प्रस्ताव रख कर लाल सिंह को खुश कर दिया।
फ़िल्म का अंत दुःखद है क्योंकि बेहतरीन हर्ट टचिंग दो किरदारों की मृत्यु दिखाई जाएगी परन्तु आप सिनेमा हॉल से संतुष्ट होकर बाहर निकलेंगे।
एक और बात… फ़िल्म में किसिंग सीन भी है जिसको थ्री इडियट से भी ज्यादा देखने वाले पसन्द कर रहे है।
~ फ़िल्म की पसंदीदा पंचलाइन
१- रूपा मेरे साथ व्याह करेगी तू
२- बाहर मलेरिया फैला हुआ है
३- जिन्दगी गोलगप्पे की तरह है, पेट भर जाता है पर मन नहीं भरता
~ फिल्म उसी को पसन्द आएगी जिन्हें तथ्य समझ आएंगे।
– गुरुद्वारे से हो रही गोलीबारी का कारण समझना।
– पीएम हाउस के बाहर तस्वीरे खिंचवाते वक्त, लाल सिंह चड्ढा एंड फैमिली को पीएम हाउस से गोलियों की आवाज सुनाई देना।
– आडवाणी के रथयात्रा का कारण पता होना।
– मलेरिया फैलने का मतलब समझ जाना।
कुल मिलाकर आमिर खान की फ़िल्म है, इस लेवल को पूरी फ़िल्म में मेंटेन रखा गया है इसलिए हमारा सुझाव भी यही है कि आप सभी पहले फ़िल्म को देखिए उसके बाद कोई परस्पेशन क्रिएट कीजिए…
समीक्षक- हर्षितेश्वर मणि तिवारी
यह लेख स्वतंत्र पत्रकार का है ये उनके अपने विचार हैं इससे वेबसाइट का सहमत व जिम्मेदार होना जरूरी नहीं है।

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