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दोस्तों आप लोग अक्सर राजनीतिक खबरों से बोर हो कर ऐसी सकारात्मक खबरों को ज्यादा पसंद करते हैं। आज मैं आपको ऐसी खबर से रूबरू कराने जा रहा हूं जिसे सुनकर जानकर काफी हैरत महसूस करेंगे। आपने थ्री ईडियट्स फिल्म तो देखी होगी जिसमें एक प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे दोनों हाथों से एक ही वक्त में लिख सकते थे। लेकिन आप को यह जानकर काफी हैरानी होगी मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के एक सकूल में लगभग बच्चे ऐसा कारनामा कर रहे हैं जो एक ही वक्त में दोनों हाथों से अलग अलग भाषा में लिखने में पारंगत हैं। इसके साथ ही ये बच्चे पांच भाषाओं की जानकारी भी रखते हैंं। यह भी माना जाता है कि ये बच्चे कंप्यूटर से भी तेज दिमाग से काम करते हैं। ये बच्चे हिन्दीए उर्दू, संस्कृत स्पेनिश और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ रखते हैं।
मालूम होकि सिंगरौली जिले के छोटे से गांव में वीणा वादिनी सकूल में 100 से अधिक बच्चे ये कारनामा कर रहे है।
1999 में वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल की स्थापना हुई थी। सिंगरौली जिले के छोटे से गांव बुधेला में रहने वाले 100 बच्चे दोनों हाथ से एक साथ लिखने में माहिर हैं। ये सभी बच्चे वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। ये दोनों हाथों से एक साथ कलम चलाते हैं, वो भी पूरी रफ्तार के साथ। इन्हें क्लास में किसी भी होमवर्क को करने में सामान्य बच्चों के मुकाबले आधा समय लगता है। इन्हें हिंदी, संस्कृत, इंग्लिश, उर्दू और स्पैनिश भाषा का ज्ञान है।

इन्हें कोई ‘थ्री इडियट्स’ फिल्म का ‘प्रोफेसर वीरू सहस्त्रबुद्धे’ तो कोई हैरी पॉटर वाला जादूगर ‘वॉल्ट मोर’ कहता है। बच्चों को यह हुनर उनके स्कूल में सिखाया जाता है। गांव के वीरंगद शर्मा ने बताया कि जबलपुर में सेना का प्रशिक्षण ले रहे थे। सेना के लिए तैयारी के समय देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बारे में बताया गया कि वे दोनों हाथ से लिखते थे। इस पर उनकी जिज्ञासा बढ़ी, तो कुछ अलग करने के लिए गांव में 1999 में यह स्कूल शुरू किया।

अब तक 17 बैच के 480 स्टूडेंट पासआउट

1999 से संचालित वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल में अब तक 17 बैच में ऐसे 480 बच्चे पासआउट हो चुके हैं, जो दोनों हाथ से लिखते हैं। 50 से ज्यादा स्टूडेंट्स सिविल सर्विसेज, आर्म्ड फोर्स, पैरामिलिट्री फोर्स सहित विभिन्न सरकारी नौकरियों में हैं। एक बच्चे को तैयार होने में चार से 5 साल लगते हैं।

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