ATTENTION EDITORS - VISUAL COVERAGE OF SCENES OF INJURY OR DEATH A man, injured in a grenade explosion in south Kashmir's Tral town, is rushed to a hospital in Srinagar September 21, 2017. REUTERS/Danish Ismail TEMPLATE OUT

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नोएडा के एक फाइवस्टार हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने पेशेंट को तुरंत बायपास सर्जरी करवाने की सलाह दी…. पेशेंट बहुत नर्वस हो गया किंतु तुरंत तैयारी में लग गया…..
ऑपरेशन के पहले वाले सारे टेस्ट हो जाने के बाद डॉक्टर की टीम ने बजट बताया….18 लाख…. जो कि पेशेंट और परिवार वालों को बहुत ही ज्यादा लगा… लेकिन… “जान है तो जहान है”… यह सोचकर वह फॉर्म भरने लगा… फार्म भरते भरते व्यवसाय का कॉलम आया तो आपरेशन की टेंशन….और रूपये के इंतजाम की उधेड़बुन में…. ना जाने क्या सोचते सोचते या पता नहीं किस जल्दबाजी में… उसने उस काॅलम के आगे “C.B.I.” लिख दिया….
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और फिर… अचानक हॉस्पिटल का वातावरण ही बदल गया… डॉक्टरों की दुसरी टीम चेकअप करने आयी… रीचेकिंग हुई… टेस्ट दोबारा करवाए गए… और… टीम ने घोषित किया कि ऑपरेशन की जरूरत नहीं है… मेडिसिन खाते रहिये ब्लाकेज निकल जायेगा।पेशेंट को रवाना करने से पहले तीन महीने की दवाइयाँ फ्री दी गई और चैकअप और टेस्ट फीस में भी जबरदस्त ‘डिस्काउँट’ दिया गया….।
इस बात को छः महीने हो गये…पेशेन्ट अब भला चंगा है… कभी-कभी उस हाॅस्पीटल में चैकअप के लिये चला जाता है… उस दिन के बाद उसका चैकअप भी फ्री होता है….और बिना चाय पिलाये तो डाॅक्टर आने ही नहीं देते….पेशेंट बहुत खुश है हाॅस्पीटल के इस व्यवहार से… गाहे बगाहे लोगो के आगे इस अस्पताल की तारीफ करता रहता है….
पर कई बार ये सोच कर बहुत हैरान होता है कि…15 साल हो गये उसे नौकरी करते… पर… “Central Bank of India” का एम्प्लॉई होने की वजह से इतनी इज्जत…..इतना सम्मान तो उसके परिवार वालों ने भी कभी नहीं दिया….जैसे वो अस्पताल वाले उसे सर पर बैठाए रखते हैं….

महेंद्र तिवारी
यह लेख स्वतंत्र पत्रकार\writer का है ये उनके अपने विचार हैं इससे वेबसाइट का सहमत व जिम्मेदार होना जरूरी नहीं है।

1 COMMENT

  1. श्रीमान विनय गोयल जी,

    सादर प्रणाम!

    मेरा नाम विश्व प्रताप गर्ग है और मेरे सहकर्मी देवेन्द्र परमार भगवान शिव के गुरू स्वरूप “भगवान गुरू गोरखनाथ” के अनुयायी हैं।

    यूपी में प्राइवेट अस्पतालों में ठगधंधा चल रहा है। ऐसे घोर स्वार्थी लोगों की कालाबाजारी करने पर उनकी जिंदगी को धिक्कार है जो किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी जेब भर रहे हैं। यह तो डकैती है। मानवता तो अपने न्यूनतम स्तर पर है।

    बहरहाल अगर आप ऐसा लिखें “यूपी के प्राइवेट अस्पतालों में लूट ठगधंधा “उचित वाक्य है ।”गोरख-धंधा” शब्द अनुचित है। और एक निम्न श्रेणी की उपहासात्मक अपमानजनक गरिमाहीन अभद्र संज्ञा है जो प्रयोग में नहीं होनी चाहिए।

    महोदय अनन्त कोटि ब्रह्मांड नायक एक शिवलिंग स्वरुप महायोगी भगवान शिव गुरु स्वरूप में “गुरू गोरखनाथ” होते हैं। भगवान शिव को चाहें आप देवों के देव “महादेव” के रूप में पूजे या भक्त वत्सल “भोलेनाथ” के रूप में या फिर महायोगी भगवान शिव के गुरू स्वरूप “गुरू गोरखनाथ” के रूप में। वह तो हर रूप में शिव ही हैं और शिव ही रहेंगे जो सदैव भक्तजनों का कल्याण ही करते हैं कोई धंधा नहीं। भगवान शिव के अति पवित्र कल्याणकारी नाम भगवान गुरू “गोरख” को किसी घटिया धंधे से जोडने से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। और शिवजी की गरिमा का हनन भी होता है।

    सादर विनती है अगर आप इस शब्द को ठीक कर लें और आगे से इस अवांछित शब्द के स्थान पर किसी बेहतर संज्ञा जैसे अवैध कारोबार /अनैतिक धंधा /धांधली /अवैध धंधा/ अनैतिक धंधा / कालाबाजारी भ्रष्टाचार /भंवरजाल /मकड़जाल /घपला / गोलमाल / घोटाला / तिलिस्मी जाल/गडबडझाला /गडबडघोटाला इत्यादि जैसे शब्दों का प्रयोग करें और एक विज्ञप्ति जारी कर रिपोर्टिंग टीम को इस पहलू की ओर भविष्य में भी प्रयोग करने से बचें तो आपकी ज्वलंत पत्रकारिता उम्दा ही प्रतीत होगी। और पाठकगण एक जुडाव भी महसूस करेंगे।

    अलख निरंजन!!

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