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अपनी जीरो कोविड पॉलिसी के चलते चीन ने खुद का बडा नुकसान किया और अपनी जनता में हर्ड इम्युनिटी नहीं बनने दी… इसके विपरित भारत में 95 फीसदी आबादी इम्यून हो गई, जबकि चीन में मात्र 15 फीसदी ही.. ओमिक्रॉन के जिस वैरिएंट बीएफ.7 को लेकर अभी हल्ला मचाया जा रहा है, उसकी हकीकत ये है कि… देश में जुलाई से लेकर अक्टूबर तक इस वैरिएंट के 4 से अधिक मरीज मिल चुके हैं , जबकि न्यूज चैनलों से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसा ढोल पीटा जा रहा है मानों ये मरीज बीते 24 घंटे में ही मिले हों… ओमिक्रॉन की जो तीसरी लहर देश में आई थी उसने बडी आबादी को संक्रमित किया था और विशेषज्ञों ने उसे नैचुरल वैक्सीन भी बताया… यही कारण है कि तीसरी लहर और उसके बाद कोरोना भारत में नुकसान नहीं पहुंचा सका और यह स्थिति अभी आगे भी कायम रहेगी… हालांकि सतर्कता और सुरक्षा सभी को बरतनी चाहिए… लेकिन जिस तरह न्यूज चैनलों ने कोरोना पर हल्ला मचाया उससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत जोड़ो यात्रा में उमड़ रही भीड़ सत्ता पक्ष को परेशान कर रही है.. और कोरोना का बहाना अच्छा है…
मजे की बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया जहां खुद मास्क लगाकर राहुल को यात्रा रोकने की सलाह देते हैं, वहीं देश को ये भी बताते हैं कि फिलहाल डरने की जरूरत नहीं है और सरकार हर स्थिति से निपटने में सक्षम है… वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक विवाह समारोह में अपने स्वास्थ मंत्री की सलाह को दरकिनार कर बिना मास्क पहुंचते हैं… गोदी मीडिया भी कम से कम अपने आका की सेहत की चिन्ता करते हुए इस पर डिबेट करें कि क्या मोदी जी को भीड़ भरे आयोजनों से परहेज नहीं करना चाहिए… हालांकि इंदौरी कांग्रेसियों ने इसका जवाब अच्छे से दिया है और मुख्यमंत्री शिवराज

सिंह चौहान से पूछा है कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन और इन्वेस्टर्स समिट में जो हजारों की संख्या में विदेशी मेहमान इंदौर आएंगे तो क्या उन्हें 7 दिन क्वारेंटाइन में रखा जाएगा..? पहले भी विदेश से ही कोरोना आयात हुआ था और अगर अभी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री वाकई चिंतित हैं तो वे इस बात का भरोसा दिलवाए कि विदेश से आने वाले हर एनआरआई की जांच होंगी और उससे कोरोना न फैलेगा, इसकी गारंटी वे लेते है.. अब कोरोना से डराने के दूसरे महत्त्वपूर्ण मुद्दे को भी समझिए… मास्क से लेकर तमाम दवाइयां और वैक्सीन बर्बाद हो रहे हैं ..आरटीपीसीआर मशीनें ठप पड़ी हैं… भारत बायोटैक की ही कोवैक्सीन के 5 करोड़ डोज अभी जनवरी में एक्सपायर हो रहे हैं तो यही स्थिति सीरम इंस्टीट्यूट की है… जिसकी करोड़ों कोविशील्ड वैक्सीन बर्बाद हो चुकी है.. ये सब कैसे और कहा खपेंगी…सोचिए.. लिहाज़ा न्यूज चैनल्स और सोशल मीडिया की प्रायोजित खबरों का असल मकसद समझिए..क्योंकि बीते 2 सालों में कोरोना बहुत कुटिल और राजनीतिज्ञ हो गया है ..!
@ *राजेश ज्वेल*
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