पिछले दस दिनों से पेट्रोल डीजल के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है जिससे आम जनता की कमर टूट रही है। लेकिन सरकार और बीजेपी के नेता इसका भी ठीकरा पिछली सरकारों पर फोड़ रहे हैं। वर्तमान में पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। पेट्रोल मंत्री ने इसका दोष उत्पादनकर्ता देशों के सिर डाल रहे हैं। बकौल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उत्पादन कर्ता देश भारत जैसे विकासील देशों के बारे में नहीं सोच रहे है। दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान में कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकार्ड निचले स्तर पर है। इस पर भी पेट्रोल भारत कई हिस्सों में सौ के पार बेचा जा रहा है। इस मुद्दे पर जब बहुत शोर हुआ तो पीएम मोदी ने मुंह खोला और पिछली सरकारों पर दोष मढ़ते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने विकास और आधुनिकता पेट्रोल डीजल की पाॅलिसी के बारे में सोचा होता तो आज देशवासियों को इतना महंगा डीजल पेट्रोल नहीं खरीदना पड़ता। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य देशों में लगभग आधे दामों पर पेट्रोल डीजल बिक रहा है।
केन्द्र की दोहरी नीति इस तरह समझी जा सकती है कि जहां इस साल चुनाव होने हैं वहां सरकार कर कम कर रही है ताकि वहां के मतदाता यह समझें कि पेट्रोल डीजल के दाम कम हो गये हैं। मोदी सरकार ने असम और मेघालय में दोनों के दाम कम करने की घोषणा कर दी है।
वेनेजुएला में रु 1.46 प्रति लीटर बिक रहा है। भारत में सरकार एक तरफ बाहरी देशों को कारण बता कर रोज दामों में इजाफा कर रही वहीं सरकारी कंपनियां पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ा कर सरकार का खजाना भरने में जटी हंै। वहीं आम जनता महंगाई के बोझ तले दबी जा रही है। भारत में पेट्रोल डीजल के दामों की बढ़ोतरी के लिये मुख्य कारण केन्द्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी है जो पेट्रोल पर 38 प्रतिशत और डीजल पर 28 प्रतिशत है। इसके अलावा अन्य प्रदेश सरकार भी वैट के नाम पर कर लगाते हैं जिसकी वजह से पेट्रोल डीजल के दामों में आग लगी हुई है। सरकार अपना कर कम नहीं कर रही है जिससे दाम कम नहीं हो रहे हैं। इन दोनों के दाम बढ़ने से जरूरी सामानों के दाम भी आसमान छूते जा रहे हैं। लेकिन केन्द्र सरकार को इस बात की कोई परवाह नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले लगभग 7 सालों से मोदी सरकार सत्ता में है इसके बावजूद मंहगाई और पेट्रोल डीजल के दामों में हो रही तेजी के लिये कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

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