आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की पोल एक बार फिर खुली है। अंतरराष्ट्रीय तौर से प्रतिबंधित लश्कर ए- तैय्यबा ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह और अफगानिस्तान में अपने नए कैंप लगा लिए हैं। इन आतंकवादी कैंपों में भर्तियां और प्रशिक्षण भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। ‘Daily Sikh’ के मुताबिक पाकिस्तान लगातार यह दावा कर रहा है कि वो आतंकवादी ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है लेकिन इसके बावजूद इस ग्रुप में भर्तियां बढ़ी हैं और इसके नेता हक्कानी नेटवर्क और इस्लामिक स्टेट खोरासन के साथ मिलकर अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं। 

आपको बता दें कि लश्कर-ए-तैय्यबा साल 2008 में हुए मुंबई हमले में शामिल था। इसके बाद पाकिस्तान-पोषित इस ग्रुप को लेकर पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर से दबाव बढ़ा कि वो इसपर कठोर एक्शन ले। लेकिन पाकिस्तान इस खूंखार आतंकवादी संगठन पर कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। 

लश्कर-ए-तैय्यबा अपनी ताकत बढ़ा रहा है इस सच्चाई को इससे भी समझा जा सकता है कि पाकिस्तान लश्कर के नेताओं का इस्तेमाल अफगानिस्तान में अपनी पकड़ा मजबूत करने के लिए कर रहा है ताकि तालिबान से उसे कोई खतरा ना हो। अफगानिस्तान में तालिबान की जीत में लश्कर ने अहम भूमिका अदा की थी और यह बात किसी से छिपी नहीं है। 

‘Daily Sikh’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि लश्कर पाकिस्तान में अपनी ताकत बढ़ा रहा है और तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया इन दोनों ही तथ्यों को दो अलग-अलग तरीकों से नहीं देखा जा सकता है। 

इससे पहले यूएस की एक मॉनिटरिंग ग्रुप ने साल 2018 में इस बात को उजागर किया था कि लश्कर पाकिस्तान में मदरसा के जरिए अपने नेटवर्क को मजबूत करने में जुटा हुआ है।  खासकर कुनर और ननग्रहर प्रक्षेत्र में तालिबान अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा हुआ है। 

मुंबई अटैक के बाद दबाव बनने के बावजूद पाकिस्तान में लश्कर का कद बढ़ता ही चला गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान आर्मी की मदद से लश्कर काफी मजबूत हुआ है और पहले से ज्यादा संगठित भी हुआ है।  
 



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