भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य संकटग्रस्त जेट एयरवेज की समाधान योजना को मंजूरी देने से पहले सरकार का समर्थन पत्र चाहते थे। रजनीश कुमार ने ‘द कस्टोडियन ऑफ ट्रस्ट’ नाम की अपनी किताब में लिखा है कि जेट एयरवेज के मुद्दे से निपटना देश के सबसे बड़े बैंक के प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सबसे कठिन कामों में से एक था।

क्या थी मुश्किल: उन्होंने एयरलाइन की समाधान योजना से जुड़े घटनाक्रमों को याद करते हुए लिखा है कि ज्यादातर बैंक जेट एयरवेज के लिए एक समाधान योजना का समर्थन करने से काफी बच रहे थे और यह बदकिस्मती से सफल नहीं हुआ क्योंकि प्रवर्तक निर्धारित जरूरी शर्तों को पूरा नहीं कर पाए।

रजनीश कुमार ने लिखा है, “मेरे लिए भी, यह सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में से एक था, यहां तक कि एसबीआई का निदेशक मंडल भी इस मुद्दे पर मेरा समर्थन करने में असहज महसूस कर रहा था। ऐसा नहीं था कि मेरे पास उनका समर्थन या सद्भावना नहीं थी, बल्कि इसकी वजह यह थी कि उन्हें लग रहा था कि इससे बैंक की प्रतिष्ठा पर काफी बड़ा जोखिम पैदा हो रहा था।”

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उन्होंने किताब में आगे लिखा है, “नतीजतन, वे वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) या नागर विमानन मंत्रालय से समर्थन का एक स्पष्ट पत्र हासिल किए बिना इस तरह के फैसले का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। मैंने एसबीआई के प्रमुख के अपने दो साल के कार्यकाल में कभी भी ऐसी मुश्किल स्थिति का सामना नहीं किया था, लेकिन मैंने इस अनुभव से काफी कुछ सीखा और यह बाद में यस बैंक के संकट का हल करने में मेरे काम आया।”

बता दें कि प्राइवेट सेक्टर के जेट एयरवेज एयरलाइन ने 17 अप्रैल, 2019 को परिचालन बंद कर दिया था। हालांकि, अब एक बार फिर इस एयरलाइन को पंख लग गए हैं और ऐसी उम्मीद है कि मार्च 2022 तक उड़ान सेवाएं फिर से शुरू हो सकेंगी। 



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