टाटा समूह के मैनेजमेंट में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। नए बदलाव में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित योजना के तहत, सीईओ 153 साल पुराने टाटा के कारोबारी साम्राज्य का मार्गदर्शन और निगरानी कर सकेंगे।

वहीं, चेयरमैन शेयरहोल्डर्स की ओर से सीईओ के कामकाज पर नजर रखेगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सीईओ पद के लिए टाटा स्टील लिमिटेड सहित टाटा समूह की अलग-अलग फर्मों के प्रमुखों का मूल्यांकन किया जा रहा है। हालांकि, इस बदलाव के लिए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन रतन टाटा की मंजूरी जरूरी है। टाटा संस, टाटा ट्रस्ट्स और रतन टाटा की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

ये खबर ऐसे समय में आई है जब कुछ ही महीनों में टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन का कार्यकाल खत्म हो रहा है। हालांकि, उन्हें एक्सटेंशन देने पर विचार किया जा रहा है। आपको बता दें कि टाटा संस, ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है और इसकी 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

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सीईओ के सामने होंगी कई चुनौतियां :  अगर मैनेजमेंट में बदलाव होता है तो टाटा समूह के सीईओ को कई चुनौतियों से निपटना होगा। टाटा स्टील 10 बिलियन डॉलर के कर्ज से जूझ रहा है तो टाटा मोटर्स को मार्च 2021 तक लगातार तीन साल तक नुकसान हुआ है। इसके अलावा रिटेल मार्केट में भी समूह अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहती है। टाटा समूह ऑल-इन-वन ई-कॉमर्स सुपरऐप लॉन्च करने की योजना बना रही है।



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