वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाजपा सरकार के बारे में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन के विचारों को लेकर उनकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि विद्वान अब तथ्यों के आधार पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पसंद व नापसंद से प्रभावित हो सकते हैं, और उनके गुलाम बन सकते हैं।

मुसव्वर-रहमानी सेंटर फॉर बिजनेस एंड गवर्नमेंट द्वारा मंगलवार को आयोजित एक संवाद के दौरान हार्वर्ड के प्रोफेसर लॉरेंस समर्स ने सीतारमण से सवाल किया कि हमारे समुदाय के कई लोगों ने खासतौर पर अर्थशास्त्री सेन ने भाजपा सरकार के संबंध में कड़ी आपत्तियां जताई हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भावना है कि सहिष्णुता की विरासत पर काफी सवाल खड़े हो रहे हैं और आपकी सरकार ने मुस्लिम आबादी के प्रति जो रवैया अपनाया है, वह सार्वभौमिकता और समावेशिता के हमारे मूल्यों के मद्देनजर अमेरिका और भारत के बीच आता है।

सीतारमण ने हार्वर्ड कैनेडी स्कूल में आयोजित संवाद के दौरान कहा, जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, उनमें भी हिंसा की घटनाओं के लिए प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) जिम्मेदार होंगे, क्योंकि यह मेरे विमर्श के अनुकूल है। उन्होंने कहा, वह डॉ़ अमर्त्य सेन, जिनका आपने जिक्र किया उनका सम्मान करती हूं। उन्होंने कहा कि वह (सेन) भारत जाते हैं, वहां आजादी से घूमते हैं। जो कुछ भी हो रहा है, उसका पता लगाते हैं। इसी से हमें, विशेषकर एक विद्वान को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन तथ्यों के आधार पर बात कर रहा है।

उन्होंने कहा, नहीं। यह चिंताजनक है कि विद्वान अब तथ्यों के आधार पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी निजी पसंद और नापसंद से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। यह वास्तव में चिंता की बात है कि विद्वान समभाव से सोचने, अपने समक्ष मौजूद तथ्यों एवं आंकड़ों को देखने और उसके बाद बोलने के बजाय अपनी पसंद एवं नापसंद के गुलाम बन सकते हैं। सीतारमण ने कहा, कोई राय होना अलग बात है और इसका तथ्यों पर आधारित होना पूरी तरह से अलग बात है। यदि राय पूर्वग्रह से ग्रस्त हो, तो उसका जवाब देने का मेरे पास कोई तरीका नहीं है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बात करने वाले यही विद्वान क्या उन राज्यों पर भी टिप्पणी करेंगे जहां भाजपा की सरकार नहीं है।



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