पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य के जनरल लचित बोरफूकन को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उन्हें पराक्रम और गौरव के पथप्रदर्शक के साथ ही असम की अनूठी संस्कृति के संरक्षक के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि लचित दिवस पर मैं बहादुर लचित बोरफूकन को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्हें पराक्रम व गौरव के पथप्रदर्शक और असम की अनूठी संस्कृति के संरक्षक के रूप में व्यापक तौर पर याद किया जाता है। वह समानता, न्याय और सभी के लिए सम्मान के आदर्शों के प्रति समर्पित थे।

लचित बोरफूकन के बारे में जानिए

बोरफूकन असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य में एक सेनापति थे। सरायघाट के 1671 के युद्ध में उनके नेतृत्व के लिए उन्हें पहचाना जाता है, जिसमें मुगल सेना का असम पर कब्जा करने का प्रयास विफल कर दिया गया था। इस युद्ध के जीतने के करीब एक साल बाद बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई थी।

इस विजय की याद में असम में 24 नवंबर को लचित दिवस मनाया जाता है। बता दें कि सरायघाट का युद्ध गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर लड़ा गया था। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को लचित मेडल से सम्मानित किया जाता है, जिसका नाम लचित बोरफूकन के नाम पर रखा गया है।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here