नई दिल्लीः भारत अपने सामरिक पेट्रोलियम भंडार (स्ट्रेटेजिक इमरजेंसी रिजर्व) से 50 लाख बैरल कच्चा तेल छोड़ने पर सहमत हो गया है. ये रिलीज समानांतर रूप से अमेरिका, चीन, जापान और कोरिया सहित  दुनिया भर की प्रमुख उपभोक्ताओं के साथ बातचीत के बाद किया गया है.

भारत ने जताई कृत्रिम रूप से तेल की डिमांड नीचे लाने पर चिंता
भारत ने तेल उत्पादक देशों द्वारा कृत्रिम रूप से तेल की आपूर्ति को मांग के स्तर से नीचे लाने की कोशिश पर चिंता ज़ाहिर की है, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतें और उपभोक्ता वस्तुओं के बढ़ते दाम के नकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं. भारत में प्रतिदिन 50-55 लाख बैरल पेट्रोलियम पदार्थों की खपत होती है, तक़रीबन इतना ही पेट्रोलियम रिज़र्व केंद्र सरकार ने जारी करने पर विश्व समुदाय के प्रमुख देशों के साथ सहमति दी है, इस कोशिश से पेट्रोलियम उत्पादक देशों यानी ओपेक देशों ख़ास तौर पर सउदी अरब पर दबाव बनाने की कोशिश है ताकि वे पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन बढ़ाए और उसके दाम काम किए जा सके. 
 
केंद्र सरकार ने घटाई थी पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी
प्रधानमंत्री मोदी घरेलू स्तर पर उच्च पेट्रोलियम डीजल की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं, मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने के लिए, भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ‘केंद्रीय उत्पाद शुल्क’ में 5 रुपए और 10 रुपए 3 नवंबर 2021 को और इसके बाद कई राज्य सरकारों द्वारा पेट्रोलियम पर पर वैट में कमी की गई है, सरकार पर भारी वित्तीय बोझ के बावजूद, नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए ये कठिन कदम उठाए गए.

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