नया वित्त वर्ष शुरू हो चुका है। अब कुछ दिनों बाद कर्मचारियों को कंपनी की तरफ से इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन सबमिट करने के लिए कहा जाएगा। यानी, आपको कंपनी को बताना होगा कि वित्त वर्ष 2021-22 में आप टैक्स बचाने के लिए कहां निवेश करेंगे या कहां टैक्स छूट पा सकते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि आप साल की शुरुआत से ही टैक्स प्लानिंग करना शुरु कर दें। ताकि, ताकि पूरे साल फाइनेंस अच्छे से मैनेज हों सके और पैसे की कोई परेशानी न आए। आइए जानते हैं वित्त वर्ष की शुरुआत से ही आपकों किन पांच बातों का ध्यान रखना होगा।

पीपीएफ में निवेश – ज्यादातर लोगों के लिए पीपीएफ सबसे पसंदीदा निवेश का माध्यम होता है। पीपीएफ में आयकर की धारा 80सी के तहत 1.50 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं। ज्यादातर लोग साल के अंत में जाकर निवेश करते हैं, लेकिन यहां ये समझने की जरूरत है कि अगर आप साल की शुरुआत में निवेश करते हैं पूरे साल का ब्याज मिलेगा। वित्त वर्ष के आखिर में निवेश करने पर आप पूरे साल के ब्याज का फायदा नहीं उठा पाएंगे।

टैक्स के लिए अभी से बनाए योजना – ज्यादातर लोग आखिरी समय में टैक्स के लिए प्लानिंग करते हैं। तब हम ऐसे विकल्पों में निवेश कर देते हैं जिसमें लॉक इन पीरियड लंबा होता है या आपकी जोखिम क्षमता के मुताबिक निवेश नहीं होता। ये हमेशा ही बेतहर होता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में ही टैक्स की प्लानिंग करनी शुरू कर दी जाए।

15एच/15जी फॉर्म – बैंक डिपोजिटर्स के खातों में ब्याज जमा करने से पहले टीडीएस काट लेता है। अगर आपकी आय छूट की सीमा से कम है, तो आपको टैक्स भरने की जरूरत नहीं है। आप बैंक में 15एच/15जी फॉर्म जमा करा दें, ताकि बैंक टीडीएस न काटे। ये फॉर्म बैंक, पोस्ट ऑफिस आदि में साल की शुरुआत में जमा करने होते हैं।

टैक्स लगाने के तरीके का चुनाव करें – टैक्सपेयर्स के पास टैक्स लगाने के दो तरीकों में से चुनाव कर सकते हैं। नये टैक्स सिस्टम टैक्सपेयर्स लोअर स्लैब का चुनाव कर सकते हैं। हालांकि, टैक्सपेयर्स को पुराने टैक्स सिस्टम में करीब 70 फीसदी टैक्स छूट को नहीं भूलना चाहिए। टैक्सपेयर्सो को आईटीआर फाइल करते हुए चुनाव करना होता है कि वह किस टैक्स स्लैब को चुनना चाहते हैं। हालांकि, पहले टैक्स स्लैब का चुनाव करने से टैक्स प्लानिंग करना आसान हो जाता है।

आईटीआर फाइल करने के लिए डॉक्युमेंट्स – आपको जल्द ही आयकर रिटर्न फाइल करनी होगी, इसलिए बेहतर होगा कि पहले ही डॉक्युमेंट को इकट्ठा कर लें। ताकि, अंतिम समय में परेशानी से बच सकें। पहले ही बैंक ब्याज की स्टेटमेंट, म्यूचुअल फंड्स निवेश, घर के किराए या होम लोन की स्टेटमेंट आदि निकाल लें।

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