ज्योति ने साइकिलिंग फेडरेशन द्वारा ट्रायल्स के ऑफर को ये कहते हुए ठुकरा दिया कि, मैं अपनी पढ़ाई पहले करना चाहती हूं. मुझे ये भी लगता है कि मैं अभी काफी कमजोर हूं क्योंकि मैं 15 साल की हूं और इतना लंबा सफर तय कर आई हैं.
कोरोना संकट के बीच जब भारत के सभी मजदूर पैदल चलकर अपने अपने गांव पहुंच रहे थे तब बिहार की एक बहादुर लड़की ऐसी भी थी जो उस दौरान गुरूग्राम में अपने पिता के साथ फंसी थी. ज्योति कुमारी नाम की इस लड़की ने ये सोच लिया था कि वो अपने पिता को साइकिल के पीछे बिठाकर 1200 किलोमीटर बिहार में अपने गांव जाएगी. पिता के पैर का इलाज चल रहा था इसलिए पिता चल नहीं पाए. ऐसे में ज्योति अकेले दम पर ही अपने पिता को लेकर गांव पहुंच गई. गांव पहुंचते ही ज्योति की इस हिम्मत को देख साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ज्योति के सामने ट्रायल का ऑफर रखा. लेकिन ज्योति ने इस ऑफर को ठुकरा दिया.
ज्योति से जब पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया तो ज्योति ने कहा कि, मैं अपनी पढ़ाई पहले करना चाहती हूं. मुझे ये भी लगता है कि मैं अभी काफी कमजोर हूं क्योंकि मैं 15 साल की हूं और इतना लंबा सफर तय कर आई हैं.
दरभंगा की रहने वाली ज्योति ने कहा कि उन्हें कुल सफर तय करने में 7 दिन का समय लगा. इससे पहले वो अपने परिवार की परेशानियों के कारण अपना स्कूल पूरा नहीं कर पाई थीं. वो घर का भी काम करती थी लेकिन अब वो अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हैं.
रविवार को लोक जनशक्ति पार्टी ने ज्योति के सामने उनके पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की बात कही. चिराग पासवान ने कहा कि, वो जो भी पढ़ना चाहती हैं मैं उन्हें पढ़ाने के लिए तैयार हूं.
अपने बेटी की इस कामयाबी और हौंसले को देखते हुए ज्योति के पिता मोहन पासवान ने कहा कि, लॉकडाउन के बाद हम उसे ट्रायल्स के लिए भेजेंगे. फिलहाल उसे कल ही 9वीं क्लास में डाला गया है जिससे वो 10वीं तक अपनी पढ़ाई पहले पूरी कर सके. उसे प्रशास ने नई साइकिल, नया ड्रेस और नए जूते दिए हैं.
बता दें कि बिहार की शान ज्योति कुमारी की चर्चा अब हर तरफ हो रही है. यहां तक की ज्योति की तारीफ अमेरिका के प्रधानमंत्री की बेटी इवांका ट्रंप ने भी की है.







