प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा में से करीब 60 प्रतिशत यानी 12 से 13 लाख करोड़ रुपये ही नयी मदद के रूप में हासिल होगा। डीबीएस बैंक की एक रपट के मुताबिक इसमें से एक बड़ी राशि रिजर्व बैंक नकदी सहायता के रूप में पहले ही दे चुका है जो इस पूरे पैकेज का हिस्सा है।    उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कोविड-19 संकट से उबरने के लिए इस पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए पहले घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपये की राशि और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बाजार को दी गयी सहूलियतें शामिल हैं। बाकी पैकेज की विस्तृत जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देंगी।

बांड बाजार पर पड़ेगा वित्तीय बोझ

डीबीएस बैंक ने इस संबंध में बुधवार को एक रपट जारी की। बैंक में अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, ” प्रधानमंत्री मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज देने की घोषणा की। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद का 9.7 प्रतिशत है। इस पूरे पैकेज में मात्र 50 से 60 प्रतिशत ही नयी राहत राशि का आवंटन होगा। अभी इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है, लेकिन इसका वित्तीय बोझ बांड बाजार पर पड़ेगा।

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उन्होंने कहा कि इस नए आर्थिक पैकेज का आकार चौंकाने वाला है। यह उम्मीद से अधिक बड़ा है। इसमें भी स्थानीय विनिर्माण और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला पर जोर देकर अर्थव्यवस्था को अधिक आत्म निर्भर बनाने की बात कही गयी है। सरकार के गरीबों के कल्याण के लिए घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपये की मदद के अलावा रिजर्व बैंक ने मार्च में 3.7 लाख करोड़ रुपये और अप्रैल में 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सहायता उपलब्ध करा चुका है। राव ने कहा, ”सरकार के पूरे पैकेज की करीब 60 प्रतिशत राशि यानी 12 से 13 लाख करोड़ रुपये ही नयी मदद के रूप में उपलब्ध होगी। यदि इसमें रिजर्व बैंक के समग्र राहत कदमों को शामिल कर लिया जाता है तो नया पैकेज करीब 10 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है।





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