उत्तर प्रदेश में हाल ही में ”लव जिहाद” के खिलाफ लाए गए अध्‍यादेश को राज्‍यपाल से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन चुका है। दूसरी और इस कानून के खिलाफ भी कई आवाजें उठ रही हैं। इसका विरोध करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मदन लोकुर भी शामिल हैं। लोकूर ने कहा है कि ये कानून फ्रीडम ऑफ च्वाइस यानी चुनने की स्वतंत्रता के खिलाफ है।

बीते रविवार को लोकुर ने एक लेक्‍चर के दौरान कहा, ‘उत्‍तर प्रदेश में हाल ही में पास हुआ वो अध्‍यादेश दुर्भाग्‍यपूर्ण है, जिसमें जबरन, धोखे या बहकावे से धर्मांतरण कर शादी कराने की बात कही गई है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि यह अध्‍यादेश चुनने की आजादी, गरिमा और मानवाधिकारों की अनदेखी करता है। 

उन्होंने  कहा कि धर्मांतरण संबंधी शादियों के खिलाफ ये कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनने की आजादी और व्‍यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए विकसित किए गए न्‍यायशास्‍त्र का उल्‍लंघन हैं।

राजनीतिक चर्चाओं में लव जिहाद कहे जाने वाले मामले को ही गैर कानूनी धर्मांतरण माना जाएगा और ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर 5 से 10 साल की सजा की बात कही गई है।

पिछले दिनों हाईकोर्ट ने एक फैसले में महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन को अवैध ठहराया था। प्रियांशी उर्फ समरीन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है। विवाह के लिए धर्म परिर्वतन आवश्यक नहीं है। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि सरकार एक प्रभावी कानून बनाएगी। इस कानून के जरिए सरकार नाम, पहचान और अपना धर्म छिपाकर बहन बेटियों के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों से सख्ती से पेश आएगी। 



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