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इधर कांग्रेस देश भर में भारत जोड़ो पदयात्रा का आयोजन कर रही है वहीं भाजपा ने कांग्रेस और जेडीयू तोड़ो मिशन चालू कर दिया है। यह बात भी सही है कि पहले कांग्रेस अपने नेताओं और विधायकों को तो जोड़ कर रखे बाद में देश और भारत को जोड़ने का ख्वाब देखे। प्दिले एक डेढ़ माह में कांग्रेस कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी को बाय बाय कर दिया है जिनमें गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, सुनील जाखड़, जयवीर शेरगिल आदि ने पार्टी से किनारा कर लिया इसमें सुनील जाखड़ और आनंद शर्मा ने तो बीजेपी की शरण ले ली है। इससे पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिबल ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
इधर राहुल गांधी भारत जोड़ो आंदोलन में लोगों के मिलते समर्थन से काफी खुश नजर आ रहे थे कि अचानक खबर आयी कि गोवा में कांग्रेस के 11 विधायकों में 8 विधायकों ने पार्टी छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया। वैसे गोआ में भाजपा की सरकार चल रही थी उन्हें किसी और के समर्थन की जरूरत नहीं थी लेकिन कांग्रेस को बरबाद करने की मंशा से भाजपा ने कांग्रेस के आठों विधायकों को बीजेपी में शामिल कर लिया। गोआ में कांग्रेस का वजूद एकदम खत्म सा है। अब उनके तीन विधायक बचे हैं वो भी कब तक रहेंगे ये बीजेपी पर निर्भर करता है। कुछ दिनों पहले ही गोआ में कांग्रेस विधायकों की बगावत करने की बात सामने आयी थी। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने समझा बुझा कर बगावत दबा दी थी। लेकिन बागियों पर नियंत्रण रखना लगता है कि कांग्रेस आला कमान के हाथ में नहीं रह गया है। इससे पहले भी भाजपा ने कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात में कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त कर सरकारें गिरायी हैं। इस मामले में भाजपा को मास्टरी हासिल है। लेकिन इसमे पूरी गल्ती भाजपा की भी नहीं है जब बिकने को लोग तैयार हैं तो भाजपा खरीदने से क्यों चूकेगी। जब बिकने वाला और खरीदार तैयार हैं क्या करेगा काजी। झारखंड में भी भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार का तख्ता पलटने की कोशिश की इसमें वो कुछ हद तक सफल भी रहे लेकिन वहां अभी भाजपा सरकार बनाने में सफल नहीं हो पा रही है। क्यों कि भाजपा पर यह आरोप लगता आया है कि वो अन्य पार्टियों के विधायकों को धनबल और बाहुबल के अलावा ईडी और सीबीआई का डर दिखा कर बिकने पर मजबूर कर देती है।
ऐसा ही कुछ हाल महाराष्ट्र में शिवसेना का भी हाल हुआ था। भाजपा ने शिवसेना के एकनाथ शिंदे को तोड़ कर पार्टी को ही तोड़ दिया। शिंदे पार्टी के चालीस विधायकों के साथ बगावत कर महा अघाड़ी परिषद की सरकार को गिरवा दिया। इतना ही नहीं एनडीए में शामिल जेडीयू के साथ भाजपा ने पहले अरुणाचल में और बाद में मणिपुर में नितीश कुमार की पार्टी के विधायकों को तोड़ लिया। इससे जेडीयू तिलमिला कर रह गया। लेकिन महाराष्ट्र के घटनाक्रम से नितीश कुमार ने सबक लिया और पार्टी टूटने से पहले ही भाजपा और एनडीए दोनों से नाता तोड़ लिया। लेकिन भाजपा का मिशन लोटस जारी रहा है। दिल्ली में भी मोदी सरकार ओर बीजेपी ने मिशन कमल खिलाने की कोशिश की लेकिन आम आदमी पार्टी के विधायकों के आगे बीजेपी की दाल नहीं गली। इसके लिये ईडी और सीबीआई का भरपूर उपयोग किया गया।

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