ठीक चुनाव के पहले भाजपा ने बंगाल फतेह करने के लिये तुरुप का पत्ता निकाला है। रामायण में राम का किरदार करने वाले टीवी कलाकार अरुण गोविल ने भाजपा का दामन थाम लिया है। वो प बंगाल में दीदी के खिलाफ भाजपा का प्रचार भी करेंगे। इतना ही नहीं वो जय श्री राम का नारा भी लगायेंगे। भाजपा के इस ट्रंप कार्ड का मतदाता पर कितना असर पड़ेगा वो दो मई को ही पता चलेगा। वैसे धार्मिक उन्माद और नारे लगाना चुनाव आचार संहिता के तहत नियमों का उल्लंघन है। लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने इस प्रकार के हथकंडे अपनाये थे। राम बरात भी निकाली थी। लेकिन चुनाव आयोग ने बीजेपी पर कोई ऐक्शन नहीं लिया। चुनाव आयोग की इस उदासीनता पर उंगलियां उठायीं थी। इस बार बीजेपी ने श्रीराम के नारे को और भी प्रभावी बनाने के लिये टीवी के राम उर्फ अरुण गोविल का कंधा इस्तेमाल करने की योजना बनायी है।
अस्सी के दशक में टीवी सीरियल रामायण का प्रसारण हुआ था। उसकी सफलता ने झण्डे गाडे़ थे। आज भी रामायण का प्रभाव लोगों में है। पिछले साल भी कोरोना काल के लाॅकडाउन में रामायण प्रसारण किया जिसको लोगों ने बड़े ही भक्ति भावना से देखा और दूरदर्शन की टीआरपी में भी भारी उछाल आया। उम्मीद से ज्यादा रामायण का प्रसारण पसंद किया गया। लोगों में भक्ति भाव इतना जगा कि घर परिवार के लोगों ने अपना सारा समय रामायण देखने में ही लगाया। दूरदर्शन ने इस सीरियल का सुबह शाम दो बार प्रसारण किया।
कुछ लोगों का कहना है कि लाॅकडाउन के दौरान जानबूझ कर ही रामायण जैसे धार्मिक लोगो को को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिये प्रसारित किया गया। मालूम हो कि रामायण के प्रसारण के दौरान बीजेपी ने टीवी ऐक्टर अरुण गोविल को शामिल करने का प्रयास किया था लेकिन उन्होंने बीजेपी का प्रस्ताव ठुकराते हुए कांग्रेस में शामिल हो गये थे। उसके बाद भाजपा ने रामायण में सीता का रोल करने वाली कलाकार दीपिका चिखालिया, रावण का किरदार करने वाले अरविंद त्रिपाठी और महाभारण में श्रीकृष्ण का अभिनय करने वाले अवनीश बधावन को लोकसभा में टिकट दिया और ये लोग सांसद बने।

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