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ये देखा जा रहा है कि जैसे जैसे आम चुनाव करीब आ रहा है वैसे वैसे नेताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है। अपने पुराने दलों से किनारा कर सत्ताधारी दल में शामिल होने को अन्य दलों के नेता बेताब हो रहे हैं। ऐसे ही एक कांग्रेस के पूर्व सीएम हैं जिन्होंने ठीक चुनाव के पहले कांग्रेस से इस्तीफा दे कर अपनी पार्टी बना कर विधानसभा चुनाव मंे अपनी किस्मत आजमाई थी। लेकिन उसमे उन्हें कोई सफलता नहीं मिली थी। प्रदेश की जनता ने उन्हें नकार दिया। उन्होंने सत्ताधारी दल से गठजोड़ किया था। उनकी रही सही इज्जत का फालूदा हो गया। पंजाब मंे तो वैसे भी बीजेपी का कोई वजूद नहीं हैं। जी हां आप का अंदाज बिल्कुल सही है यहां हम बात कर रहे हैं पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की जिन्होंने यह तय कर लिया है कि वो अब। बीजेपी मे शामिल होंगे।
80 साल के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में दो बार सीएम की जिम्मेदारी उठायी थी। लेकिन अपने अक्खड़ स्वभाव के चलते उनकी ही पार्टी के नेता और विधायक उनसे नाराज रहते थे। उनके अंदाज बिल्कुल बादशाहों की तरह थे। वो अपनी सरकार के मंत्रियों तक से ज्यादा मुलाकात करने में रुचि नहीं रखते थे। ज्यादा जनसंपर्क में भी विश्वास नहीं रखते हैं। यही वजह रही कि उनके विधायकों और मंत्रियों ने उनके खिलाफ बगावत कर दी थी। मामला गंभीर हुआ तो प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और असंतुष्ट मंत्रियों व विधायकों ने दिल्ली दरबार में अपनी गुहार लगायी। दरबार ने मामला किसी तरह रफा दफा कर वापस पंजाब भेजा सोचा कि मामला सुलट गया। लेकिन मामला काफी उलझ गया। सीएम अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच मतभेद और भी बढ़ गये। सिर पर पंजाब के चुनाव थे लेकिन पार्टी सरकार के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा था।
ठीक चुनाव के पहले कैप्टेेन ने सरकार की जिममेदारी छोड़ते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। उनको समझाने बुझाने की काफी कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने यह कह कर बात नहीं मानी कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है। अब वो कांग्रेस में वापस नहीं आयेंगे। इसी दौरान उन्होंने होम मिनिस्टर अमित शाह से भी मुलाकात की। इस मुलाकात से यह अंदाज लग रहा था कि अमरिंदर सिंह और बीजेपी के बीच कुछ खिचड़ी पक रही है। लेकिन इस बीच अमरिंदर सिंह ने अपना एक राजनीतिक दल पंजाब लोक कांग्रेस बना लिया और यह ऐलान किया कि वो चुनाव में अपने उम्मीदवार खड़ा करेंगे। बाद में उन्होंने बीजेपी के साथ गठजोड़ कर चुनाव लड़ा लेकिन उनकी रही सही साख भी धुल गयी। जनता में यह संदेश गया कि अमरिंदर सिह सत्ता के लिये ही कांग्रेस को छोड़ा था। कांग्रेस ने उन्हें मौकापरस्त करार दिया और उन्हें प्रचार के दौरान उन्हें पार्टी का गद्दार साबित कर दिया। लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ। आज की तारीख पंजाब में प्रचंड बहुमत की सरकार है।

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