भारत समेत दुनियाभर की सुरक्षा के लिए क्रिप्टोकरेंसी बड़ा खतरा बन गया है। चेन एनालिलिस की ग्लोबल रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिप्टोकरेंसी के जरिये मनी लांड्रिंग, घोटाले, फिरौती, रिश्वतखोरी, हैंकिंग, डार्कनेट मार्केट और आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग की जा रही है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी अपराध जगत में पसंदीदा लेन-देन माध्यम इसलिए बन गया है क्योंकि इसमें उपयोगकर्ता की पहचान करना लगभग असंभव है। इसलिए यह अपराधियों के लिए एक सुरक्षित माध्यम बन कर उभरा है।

क्यों अपराध जगत दे रहा क्रिप्टो को प्राथमिकता?

विशेषज्ञों का कहना है क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉक चेन तकनीक पर तैयार किया जाता है। इस सिस्टम में उपयोग करने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है। ऐसे में इसके जरिये लेन-देन में अपराधियों को अपनी पहचान गुप्त रखने में मदद मिलती है। क्रिप्टो के जरिये लेन-देन में पहले चरण का पता चलता है कि किस खाते में पैसा जमा किया गया है लेकिन किसने पैसे दिए हैं और कितने पैसे दिए हैं यह जानकारी लगाना बहुत ही मुश्किल है। इसलिए साइबर अपराध जगत में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

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दुनियाभर में तेजी से बढ़ी क्रिप्टो करेंसी की संख्या

साल कुल क्रिप्टोकरेंसी

2013-66

2014-506
2015-562

2016-644
2017-1335

2018-1658
2019-4501

2021-7557

मादक पदार्थों की तस्करी में भी इस्तेमाल

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया जानकारी से यह पता चला है क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से मादक पदार्थों की तस्करी में भी बढ़ा है। इसके साथ ही दुनियाभर के कई आतंकी संगठनों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है।

इसलिए बनी चिंता की वजह

-सफेदपोश अपराधों का गढ़ बनती जा रही क्रिप्टो की दुनिया
-मनी लांड्रिंग इन अपराधों की सबसे बड़ी जड़, अरबों का हो रहा बेनामी लेन-देन

– निवेश स्कैम, पोंजी स्कीम, फिशिंग, फेक टोकन सेल, ब्लैकमेल जैसे अपराधों में लेन-देन
– मनी लांड्रिंग, घोटाले, रैंसमवेयर, रिश्वतखोरी, हैंकिंग, डार्कनेट मार्केट, आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग बनी चिंता की वजह

छोटे निवेशक निवेश से बचें

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेशक को लेकर इन दिनों कई लुभावने विज्ञापन टीवी और इंटरनेट पर चलाए जा रह हैं। हालांकि, छोटे निवेशकों को मोटे रिटर्न की लालच में नहीं आना चाहिए और निवेश करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना बहुत जोखिम भरा है क्योंकि नियामक नहीं होने से इसमें बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है। वहीं, क्रिप्टोकरेंसी न करेंसी की कैटेगरी में न ही कमोडिटी है। इसलिए इसमें निवेश बहुत ही जोखिम भरा है।

रैंसमवेयर के जरिये उगाही?

साइबर अपराधाी रैंसमवेयर के जरिये उगाही कर रहे हैं। रैंसमवेयर एक प्रकार का मालवेयर होता है जिसे की एक खास मकसद से बनाया गया है। यह मालवेयर कंम्प्यूटर में लोड लोग होकर कुछ ही सेकेंड में ये सारी फाइल और डक्यूमेंट को लॉक कर देता है। इसके बाद इससे खोलने के लिए साइबर अपराधाी क्रिप्टोकरेंसी में वसूली करते हैं।

रैंसमवेयर में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल

क्षेत्र             हिस्सेदारी

वैश्विक      18.1%

उत्तरी अमेरिका- 51.90%
उत्तर कोरिया-1.6%

तुर्की-1.8%
चीन-5.8%

यूरोप-17.40%



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