अगर आप नौकरीपेशा शख्स हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। दरअसल, हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियम में बदलाव हुआ है। 

नए नियम के तहत नौकरी बदलने के बाद कर्मचारी की नई कंपनी में ईपीएफ अकाउंट ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो जाएगा। अब तक ये नियम नहीं था। आसान भाषा में समझें तो नौकरी बदलने के बाद भी ईपीएफ अकाउंट नंबर वही रहेगा। फिलहाल, यूएएन नंबर वही रहता है लेकिन ईपीएफ अकाउंट नंबर बदल जाता है। 

अभी क्या होता है: अगर कोई ईपीएफ सदस्य अपनी नौकरी बदलता है, तो नई कंपनी के साथ एक नया ईपीएफ अकाउंट खोला जाता है। ऐसे में कर्मचारी को पिछली कंपनी के पास रखे गए ईपीएफ अकाउंट में जमा पैसे को नए खाते में ट्रांसफर करने की जरूरत पड़ती है। यह प्रक्रिया मेंबर सर्विस पोर्टल के जरिए पूरी की जाती है। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और आधार की लिंकिंग हुई हो। यदि ऐसा नहीं है, तो नई कंपनी को एक फॉर्म जमा करके ट्रांसफर कराना पड़ता है।

ईपीएफ ट्रांसफर जरूरी क्यों: असल में ईपीएफ राशि को टैक्स से छूट तभी मिलती है, जब किसी के पास लगातार पांच साल की सेवा हो, भले ही वह अलग-अलग कंपनियों में ही क्यों ना हो। अगर अकाउंट ट्रांसफर नहीं हुआ है तो पिछली कंपनी के साथ बिताई गई अवधि को सेवा की अवधि में शामिल नहीं किया जाता है। आपके पास लगातार पांच साल की सेवा नहीं है, तो आपको पिछले ईपीएफ खाते में ब्याज के साथ प्राप्त राशि कुछ शर्तों के अधीन टैक्स योग्य हो जाएगी।

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बहरहाल, नए नियम के लागू होने का फायदा उन लोगों को होगा, जो समय-समय पर नौकरी बदलते रहते हैं। इसके लिए ईपीएफओ ने  C-DAC के जरिए एक केंद्रीकृत IT-इनेबल्ड सिस्टम को विकसित करने की मंजूरी दे दी है।



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