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इसी साल महा विकास अघाड़ी की सरकार गिरवा कर भाजपा ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से अपना बदला ले लिया है। ऐसा महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक सभा के दौरान यह बयान दिया है। उनका कहना था कि उन्हें धोखा देने वाले को वो कैसे छोड़ सकते हैं। 2019 में शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनायी थी। जब कि भाजपा सिंगल लार्जेस्ट पार्टी थी। शिवसेना ने न केवल भाजपा के साथ दगा किया बल्कि उन्होंने जनता के साथ भी गद्दारी की थी। देवेंद्र फडणवीस का यह बयान उस समय आया जब कि शिवसेना के लगभग 40 विधायकों ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनायी है। डिप्टी सीएम के इस बयान से शिंदे गुट के विधायक काफी बौखला गये हैं। उन्हें लग रहा है कि भाजपा ने उन्हें बलि का बकरा बना कर अपनी सरकार बनायी है।
शिंदे गुट के विधायकों की हालत धोबी के कुत्ते घर के न घाट के जैसी हो गयी है। सीएम शिंदे के तो भाग्य ही खुल गये क्यो कि उन्होंन कभी भी नहीं सोचा होगा कि भाजपा उन्हें सीएम बना देगी। लेकिन उनके यह अच्छे दिन बहुत जल्द ही बुरे दिनों बदलने वाले हैं। भाजपा ने अपने पूर्वमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यूं ही उप मुख्यमंत्री नही बनाया है। वो तो बस उद्धव ठाकरे की मजबूत सरकार को गिराना चाह रही थी। वो उन्होंने एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर महा विकास अघाडी सरकार को गिरा दिया। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र की सबसे पुरानी और मजबूत पार्टी शिवसेना को देा भागों में बांट दिया। एक धड़ा एकनाथ शिंदे के हाथ लगा तो दूसरे की कमान उद्धव ठाकरे के हाथ में हैं। अब दोनों ही घटक असली शिवसेना के लिये अदालत की शरण में हैं।
शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के समय से भाजपा महाराष्ट्र में जूनियर पार्टी के रूप में रही थी। जब से केन्द्र में मोदी सरकार बनी है तब से शिवसेना को यह एहसास कराया जा रहा है कि अब भाजपा महाराष्ट्र में सीनियर पार्टी है और आने वाले समय में वो पूरे महाराष्ट्र में छा जायेगी। इस बात का एहसास शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को हो गया है। इसलिये वो चौकन्ने तो हो गये लेकिन तब तक वो भाजपा की साजिश का शिकार बन चुके थे। भाजपा ने अक्सर अपने सहयोगी दल को दगा दिया है। जनता दल यू भी उनकी इस साजिश का शिकार हो चुकी है। अरुणाचल और मणिपुर में भाजपा ने जेडीयू के लगभग एक दर्जन विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर नितीश कुमार को झटका दिया है। बिहार में भी भाजपा ने एकनाथ शिंदे बनाने की साजिश रची लेकिन कूटनीतक के दिग्गज नितीश कुमार भाजपा की चाल समझ गये और आरसीपी सिंह को पार्टी से किनारे कर दिया। किसी समय में आरसीपी सिंह नितीश कुमार के राइट हैंड हुआ करते थे। भाजपा ने नितीश कुमार के खास आरसीपी सिंह को तोड़ लिया और उन्हें बगावत करने के लिये राजी कर लिया था। बिना नितीश की मंजूरी के मोदी ने आरसीपी सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया था। तभी से नितीश कुमार सजग हो गये और बिहार में आपरेशन लोटस सफल नहीं हो सका।

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