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जन अधिकार संघर्ष परषद ने करायी एफआईआर
कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में जनअधिकार संघर्ष परिषद के संस्थापक आदर्श आर अय्यर ने पीपुल्स रिप्रेसेंटेटिव कोर्ट में एक शिकायत दर्ज करायी कि जांच एजेंसियों ने कुछ व्यापारियों को फर्जी केस में फंसा कर जेल भेजने की धमकी दे कर उनसे बीजेपी को चुनावी चंदा दिलवाया। इतना ही नहीं। चंदा न देने पर उनको ईडी सीबीआई और आयकर विभाग के छापों कर दिखाया गया। ये मामला लोकसभा चुनाव के पहले की बतायी जाती है। कर्नाटक में कुछ व्यापारियों के आफिस व आवास पर सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग की टीमों ने रेड डाली। बाद में उनसे डील की और भाजपा के लिये चुनावी बांड खरीद करवायी बाद भाजपा को चंदे में दिया गया। कोर्ट ने मामले की गहन छानबीन के बाद पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया। मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन समेत भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष डीवाई विजेंद्र व भाजपा सांसद नलिन कुमार काटिल का नाम भी नामजद किया गया है। डीवाई विजेंद कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदुरप्पा के बेटे हैं। उन पर भी लोकायुक्त के आदेश पर भ्रष्टचारार का मामला चला था। इस मामले में भाजपा यह कह कर वित्त मंत्री व आरोपी नेताओं का बचाव कर रही है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार जानबूझ कर साजिश रच कर बदनाम करने की कोशिश कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिनों पहले कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ एक फ्राड का मामला सामने आया था। उस मामले को लेकर राज्यपाल थावरचंद गहलौत ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इससे कर्नाटकम में कांग्रेस की सरकार को झटका लग सकता है। ये मामला पूरा राजनीतिक होता भी दिख रहा है।
कांग्रेस ने वित्त मंत्री और नामजद लोगों का इस्तीफा मांगा
जैसे कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में जबरन चुनावी चंदा वसूली का मामला दर्ज हुअ। कांग्रेस को भाजपा और सरकार पर हमलावर होने का मौका मिल गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में प्रेसवार्ता कर मामले की गंभीरता के बारे में बताते हुए कहा कि जबरन चुनावी चंदा वसूली का यह मामला काफी गंभीर है। जांच एजेंसिया सीधे वित्त मंत्री को रिपोर्ट करती हैं। अगर ऐसे में जांच एजेसिंयां पार्टी मजबूर कर रही है। फंड में धमका कर चंदा जमा करने पर अगर वही जांच एजेंसियां छापे मारकर उद्योगपतियों को फर्जी मामले में फंसा कर जेल भेजने की धमकी देते हैं।

Opposition parties are claiming that CBI & ED are pupet of Modi Govt.
Opposition parties are claiming that CBI & ED are pupet of Modi Govt.

बाद में उनसे भाजपा में चुनावी बांड के जरिये अवैध चंदा वसूली की गयी है। जनाधिकार संघर्ष परिषद के अनुसार कॉपर और एल्यूमिनयम के उद्योपपि के आफिस पर रेड डालकर करोड़ोंं रुपये के चुनावी बांड खरीदवा कर भाजपा को चंदे केे रूप में दिलवाया गया है। जानकारी के अनुसार इस तरह के अनेक मामले हैं जिनके जरिये आठ हजार करोड़ से अधिक के चुनावी बांड खरीदवा कर भाजपा को दान किये गये हैं। ऐसे में वित्त मंत्री को नैतिेकता के बल पर पद से इस्तीफा दे देना चाहिये। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम उनके इस्तीफे के लिये कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।
जांच एजेसियों ने वसूली के चार तरीके अपनाये
कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने प्रेस के सामने बताया कि चुनावी चंदा वसूलने के लिये जांच एजेंसियों ने उद्योगपतियों से चुनावी बांड खरीदवाने के लिये चार तरीके अपनाये हैं। पहला प्री पेड यानी चुनावी बांड खरीद कर पार्टी फंड में जमा कराओ। उसके बाद जांच एजेंसियां उनको कर्रवाइयों से बचाने का कामा करेगी। दूसरा तरीका पोस्ट पेड का है उसमें पहले सरकारी ठेका दिया जाता है बाद में चुनावी बांड खरीद कर उसे बीजेपी के फंड में दान करना होता है। इसे पोस्ट पेड कहा जा सकता है। चुनावी बांड घोटाले में यह पता चल गया है कि बहुत सारी कंपनियों के दफ्तरों में छापे मारे गये बाद में डील होने के बाद मामलों को रफ दफा कर दया जाता है। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक के लॉटरी किंग का मामला है जिसने छापा पड़ने के बाद सैकड़ों करोड़ के चुनावी बांड खरीद कर पार्टी फंड में दान किया गया था। मेघा इंजीनियरिंग का भी कुछ ऐसा ही मामला था उसने सैकड़ों करोड़ के चुनावी बांड खरीदे और भाजपा को दान दे दिया। ऐसे अनेक मामलों का खुलासा हुआ था जिसमे छापा पड़ने के बाद उस कंपनी ने करोड़ों रुपये के चुनावी बांड खरीदे और भाजपा को दे दिये। बाद में उनके मुकदमे बंद कर दिये। अरविंदो फारमा के साथ भी ऐसा हुआ। पहले अरविंदो फार्मा के एक डाइरेक्टर शरत चंद्र रेड्डी को पीएमएलए के मामले में गिरफ्तार किया गया। पांच माह तक उसे जेल में रख गया।

ED arrested CM Arvind Kejrewal in connection of Delhi liquor policy scam
ED arrested CM Arvind Kejrewal in connection of Delhi liquor policy scam

डील हो जाने के बाद उस कंपनी ने पांच करोड़ के चुनावी बांड खरीद कर पार्टी फंड में दिया तब उसे बेल मिल गयी। ईडी ने उसकी बेल का विरोध भी नहीं किया। इतना ही नहीं रेड्डी ने दिल्ली शराब घोटाले में ईडी के दबाव में अरविंद केजरीवाल का नाम भी लिया। उसी समय से रेड्डी के बयान को आधार बना कर ईडी ने मार्च में केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। पांच माह बाद केजरीवाल को सुप्रीमकोर्ट से बेल मिल गयी । इससे यह पहला मामला न हीं था जब सुप्रीमकोर्ट से पीएमएलए के आरोपियों को उच्चतम न्यायालय से बेल दी गयी है। पिछले साल शिवसेना सांसद संजय राउत को ईडी ने फर्जी मामले में गिरफ्तार कर 100 दिन तक जेल में रखा। उस मामले में कोर्ट ने ईडी को फटकारते हुए कहा कि यह मामला पीएमएलए का है ही नहीे है। इसी तर्ज पर सांसद संजय सिंह के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट बेल दे दी थी। झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को भी ईडी ने जमीन घोटाले के फर्जी मामले मे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन्हें भी पांच माह बाद झारखंड हाइकोर्ट से बेल ग्रांट करते हुए कहा कि सोरेन के खिलाफ प्राइमा फेसी पीएमएलए का कोई केस नहीं बनता है। पूर्व उपमुख्य मंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीमकोर्ट ने बेल ग्रांट कर दी। इसी तरह बीआरएस की नेता के कबिता को पीएमएलए के मामले से सुप्रीम कोर्ट बेल ग्रांट कर दी। इन सभी मामलों में सुप्रीमकोर्ट ने ईडी सीबीआई को फटकारा है और ईमानदारी से काम करने की नसीहत दी है।

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