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यह पिस्तौल 1945 में अंग्रेजों द्वारा गोरखपुर मठ के महंत दिग्विजय नाथ को दी गई थी… जिसकी चोरी की रिपोर्ट मिलने के तीसरे ही दिन ही लिखा दी गई थी…
ये पिस्तौल नाथूराम गोडसे के पास थी। नाथूराम गोडसे ने अपने हाथ पे अब्दुल्लाह गुदवा लिया था…
और फिर महात्मा गांधी को 30जनवरी 1948 को गोली मार दी थी… संघीयों ने ये अफवाह भी उड़ाई कि एक मुस्लिम ने गाँधी की हत्या कर दी है…
संयोगवश कुछ लोगों ने गोडसे को पकड़ लिया और पहचान लिया…
जिसके पश्चात् तुरंत प्रसारण हुआ रेडियो पर की एक हिन्दू ने महात्मा गांधी को शहीद कर दिया है… इस तरह से एक बड़ा प्रायोजित दंगा होने से भारत को बचा लिया गया…इस सबका जिक्र आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है… और आज वही संघी देश के ठेकेदार और हिन्दुओं के ठेकेदार बने बैठे हैं…








