2017 में हुए विधान सभा चुनाव में चुनाव आयोग अधिकारी ने जानबूझ कर बीजेपी प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह चुडास्मा को जिता दिया था जिसका पता चलते ही 2020 में गुजरात हाई कोर्ट ने चुनाव रद कर दिया है। वर्तमान सरकार में चुडास्मा कानून और शिक्षा मंत्री बने हुए है। कांग्रेस पत्याशी आश्विन राठौड़ ने चुडास्मा पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया था। राठौड़ ने इसी बात को लेकर गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश के बाद चुडास्मा सुप्रीम कोर्ट चले गये थे। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है।

जब बीजेपी नेता भूपेंद्र सिंह चुडासमा ने 327 मतों से जीत हासिल की थी। उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के उम्मीदवार अश्विन राठौड़ ने यह आरोप लगाया था कि मतगणना के दौरान धांधली और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया था। इन्हीं सब बातों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

कांग्रेस नेता अश्विन राठौड़ ने 429 डाक मतपत्रों के पुन: सत्यापन की मांग की थी, जिसे रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज करते हुए बीजेपी नेता भूपेंद्र सिंह को विजयी घोषित कर दिया था।

अश्विन राठौड़ द्वारा दायर याचिका हाईकोर्ट में 73वीं सुनवाई में इस केस पर फैसला आया है. कांग्रेस नेता द्वारा दाखिल की गई याचिका में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने यह पाया कि जानी ने पोलिंग सेंटर के अंदर जानी फोन पर बात करते हुए आसानी से सुने और देखे जा सकते थे।

कोर्ट ने राजस्थान कैडर की आईएएस अफसर विनीता बोहरा को भी पार्टी बनाया था जो उस समय वहां की आब्जर्वर थीं। कोर्ट को यह बात तब पता चली जब सुनवाई के दौरान बतौर सुबूत बातचीत का रिकॉर्डेड वीडिया पेश किया गया जिसमें यह साफ देखा गया कि जानी पूरी तरह से परिणाम चुडासमा के पक्ष में करने के लिए अधिकारियों पर दबाव डाल रहे थे।

 

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