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देश में इस साल के अंत में दो प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जहां बीजेपी की साख गिरवी है। पहला प्रदेश गुजरात हैं जो मोदी और का गृह प्रदेश है और बीजेपी का वर्चस्व पिछले 27 सालों से कायम है। इसलिये वहां इस बार का चुनाव काफी कांटे का होने वाला है। यहां का चुनाव बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच होता दिख रहा है। कांग्रेस का गुजरात में ग्राफ काफी गिरता जा रहा है। यहां कांग्रेस का संगठन भी काफी कमजोर होता जा रहा है। इससे कांग्रेस के खाली स्थान को आम आदमी पाटने को सक्रिय हो गयी है। ये बात भाजपा को रास नहीं आ रही है। इस बात से उसको काफी गुस्सा आ रहा है कि उनके गुजरात में आम आदमी पार्टी की जनसभाओं, रैलियों में लोगों का सैलाब उमड़ रहा है। इसलिये भाजपा के कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमलावर हैं।
दूसरा प्रदेश हिमाचल है जहां बीजेपी की सरकार है। वहां भी आम आदमी पार्टी कड़ी टक्कर देती दिखाई दे रहे हैं। यही बात बीजेपी और मोदी शाह को हजम नहीं हो रही हैै। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन हिमाचल चुनाव के प्रभारी बनाये गये हैं। श्री जैन हिमाचल में अपनी जिम्मेदारी काफी सक्रियता व कुशलता से निभा रहे थे। यह बात भी बीजेपी को हजम नहीं हुआ। मोदी शाह ने ईडी ने पूछताछ के लिये जैन को कार्यालय बुलाया बाद में उन्हें मनी लांड्रिंग के मामले जेल भेज दिया। फिलहाल वो इस समय जेल की सीखचों के पीछे हैं। अरविंद केजरीवाल ने सतेंद्र जैन की जगह अब उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को हिमाचल का अतिरिक्त प्रभार साैंप दिया। इससे बीजेपी और खिसिया गयी। पहले तो मनीष सिसोदिया को भाजपा नेताओं ने यह प्रलोभन दिया कि अपने खास विधायकों को लेकर बीजेपी ज्वाइन कर लें। जितने केसेस दर्ज हैं सब हटवा दिये जायेंगे। लेकिन बात नहीं बनी तो पहले एलजी विनय कुमार सक्सेना ने मनीष सिसोदिया पर दिल्ली शराब नीति में घोटाले का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिये। इसके बाद सीबीआई ने सिसोदिया के आवास और करीबी रिश्तेदारों के घरों पर रेड पड़ गयी। रेड में सीबीआई को कितनी सफलता मिली ये किसी को नहीं मालूम। मनीष सिसोदिया ने कहा कि सीबीआई को रेड मे कुछ भी हाथ नहीं लगा है। ये सब राजीति से प्रेरित रेड डाली जा रही है। जिस दिन से एलजी ने पद संभाला है उसी दिन दिल्ली सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। सबसे पहले सीएम केजरीवाल के सिंगापुर दौरे पर रोक लगायी। इसके बाद दिल्ली सरकार के अफसरों को दिल्ली से बाहर भेजने शुरू कर दिया। दिल्ली सरकार की हर फाइल पर कमियां निकाली जानें लगी। इससे जाहिर हो गया कि विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली का एलजी ही इसीलिये बनाया गया कि दिल्ली सरकार को भरपूर परेशान करना है।
भाजपा और मोदी सरकार ने सोचा कि इन हथकंडों से आम आदमी पार्टी परेशान हो जायेगी। अपने बचाव में लग जायेगी चुनाव प्रचार से उसका ध्यान भटक जायेगा। लेकिन आप बीजेपी की इन हरकतों से परेशान होने के बजाये गुजरात और हिमाचल में ज्यादा सक्रिय हो गयी है। इतना ही नहीं मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई के छापे पड़ने के बाद गुजरात में आप की लोकप्रियता में 4 फीसदी का इजाफा देखा गया। यह भी माना जा रहा है कि अगर मनीष सिसोदिया को पुलिस गिरफ्तार करती है तो वोट शेयरिंग में 4 प्रतिशत की उछाल आ सकती है। बीजेपी गुजरात के बदलते समीकरण से काफी चिंतित हो रही है। पहले आप कार्यकर्ता शहरों से दूर गांवों में ज्यादा सक्रिय थे। लेकिन इधर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ अहमदाबाद, राजकोट, सूरत और मेट्रो सिटीज में चुनाव प्रचार तेज कर दिया। इससे बीजेपी की रातों की नींद उड़ गयी है। राजनीतिक विश्लेषको का मानना है कि सतेंद्र जैन को ईडी की गिरफ्तार करने और मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई के रेड दो ऐसी गल्तियां कर दी हैं, उसका खामियाजा बीजेपी को गुजरात औ हिमाचल में उठाना पड़ सकता है।

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