पिछले छह सात सालों में दिन ब दिन कमजोर होती जा रही है। एक के बाद कांग्रेस शासित प्रदेशों में उनकी सरकारें गिरती जा रही हैं और वहां बीजेपी सत्ता में काबिज होती जा रही है। या तो कांग्रेसी विधायक बीजेपी की झोली में स्वयं गिर जाते हैं या बीजेपी उन्हें किसी भी कीमत पर अपने पक्ष में कर लेती है। 2018 में कांग्रेस ने बड़ी मेहनत कर कर्नाटक, राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकारें बनायीं थ्ी लेकिन कुछ समय बाद कर्नाटक में सत्ता का परिवर्तन हो गया बीजेपी ने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को धन बल से खरीद लिया और वहां बीजेपी ने एक बार फिर कमल खिला दिया। मोदी सरकार और बीजेपी ने सामदाम दण्ड भेद नीतियां अपना कर सत्ता हासिल कर ही ली। चुनाव के परिणाम ऐसे आये कि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला फिर भी भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनाने का प्रयास किया लेकिन बहुमत न होने की हालत में फ्लोर टैस्ट से पूर्व बीएस येद्दूरप्पा ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन विधायकों को तोड़ बीजेपीन कए बार फिर कर्नाटक में सत्ता पर कब्जा कर लिया।
उसके बाद बीजेपी ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लगभग दो दर्जन विधायकों को अपने पाले में कर कमलनाथ सरकार को गिरवा दिया और शिवराज एक बार फिर मध्यप्रदेश के सीएम बन बैठे। इस सरकार को बनवाने में कांग्रेस के पूव सांसद व कैबिनेट मंत्री ज्योतिरादित्या सिंधिया ने अहम् भूमिका निभाई। वैसे सिंधिया को राहुल गांधी का करीबी माना जाता था। लेकिन इस बावजूद सिंधिया ने कांग्रेस के पंजे को छोड़ कमल को थाम लिया।
इसके बाद कांग्रेस को झटका पुद्दूचेरी में लगा जहां कांग्रेस के 6 विधायकों ने इ्रस्तीफा दे कर नारायण स्वामी की सरकार को गिरवा दिया। इसमे अहम् भूमिका बीजेपी 3 मनोनीत विधायकों की रही जिनके उकसाने पर ही कांग्रेस के छह विधायकों ने कांग्रेस से बगावत कर दी और सरकार गिर गयी। फिलहाल वहां अब राष्ट्रपति शासन लग गया है।

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