राजनीतिक चमक दमक और भविष्य को देखते हुए खिलाड़ियों में पाॅलिटिक्स में अपना भाग्य आजमाने में जुट गये है। कुछ तो सफल हो गये हैं और कुछ गुमनामी के अंधेरे में खो गये। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि खिलाड़ियों और सेलिब्रिटी इंडस्टी के लोग लगातार राजनीेति में कदम बढ़ा रहे हैं। ताजा मामला क्रिकेट से जुड़े एल शिवराम कृष्णन का है जिन्होंने भाजपा से नाता जोेड़ लिया है। मालूम हो कि 2021 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होना है। बीजपेी दक्षिण भारत में कमल खिलाना चाह रही है। इसलिये वो हर हथकंडा अपना रही है जिससे जीत की उम्मीद कायम रहे है। पार्टी हर उस शख्सियत को पार्टी जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं जिसकी लोकप्रियता से फायदा उठाया सके। प बंगाल में विधानसभा को देखते हुए भाजपा ने बंगाल टाइगर उर्फ सौरब गांगुली को पार्टी में लाने का प्रयास कर रही है। ममता दीदी के मुकाबले वो सौरब गांगुली को खड़ा करने का विचार कर सकती हैं। पिछले आम चुनाव में धमाकेदार बल्लेबाज गौतम गंभीर ने बीजेपी का दामन और चुनाव लड़ा। वर्तमान में गोतम गंभीर दिल्ली के सांसद हैं।
राजनीति में काफी समय पहले टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मो. अजहरुद्दीन ने प्रवेश किया था। कांग्रेस ने उन्हें यूपी से लोकसभा का चुनाव लड़ने का मौका दिया और वो सांसद बन भी गये। अजहर ने जैसा प्रदर्शन क्रिकेट में किया वैसा जलवा वो राजनीति में नहीं दिखा पाये। उन्होंने दूसरी बार भ वो चुनाव खड़े हुए लेकिन चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा।। लेकिन वो अभी भी कांग्रेस से जुड़े हुए है। पूर्व क्रिकेटर चेतन चैहान भाजपा का दामन लिया और उनके टिकट पर चुनाव भी लड़े। इतना ही नहीं यूपी की वर्तमान यूपपी सरकार में युवा कल्याण और खेलमंत्री भी थे। दुर्भाग्य से कोरोना के चलते उनका निधन उपचार के दौरान हो गया। अनुराग ठाकुर भी क्रिकेटर थे वो बात दीगर है कि उनका कॅरियर लंबा नहीं है। उनके पिता धूमल ठाकुर हिमाचल के सीएम रहें। इस वजह से अनुराग ठाकुर ने राजनीति का रुख कर लिया और आज वो वर्तमान केन्द्रीय राज्य मंत्री हैं।
एक और सीएम के बेटे कीर्ति आजाद ने भी क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के बाद राजनीति के क्षेत्र में कदम बढ़ा दिया। उनके पिता भागवत झा आजाद कांग्रेस के नेता थे और बिहार के सीएम थे। उसके बावजूद उन्होंने भाजपा को अपनाया और उनके टिकट पर दो बार सांसद भी बने। लेकिन भाजपा में उन्हें वो सम्मान और ओहदा नहीं दिया गया। भाजपा नेता अरुण जेटली से आजाद का छत्तीस का आंकडा था इसी अंतरविरोध के चलते उन्होंने भाजपा को छोड़ा और कांग्रेस के हो गये। लोकसभा 2020 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन वो हार गये।
नवजोत सिंह सिद्धू ने भी क्रिकेट जगत में काफी नाम कमाया है क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्या ले ली और बीजेपी के टिकट पर दो बार सांसद बने। लेकिन तीसरी बार पार्टी ने उनके स्थान पर अरुण जेटली को टिकट दिया तभ से उने और पार्टी के बीच मतभेद उभरने लगे। हालात इतने बिगड़े कि सिद्धू ने भाजपा से किनारा करत हुए कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

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