PM Modi favour to Chirag Paswan for Minister post in cabinate
PM Modi favour to Chirag Paswan for Minister post in cabinate

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फिल्मों में फेल राजनीति में हिट चिराग

बिहार की राजनीति में चिराग पासवान एक जाना माना नाम है। भले ही इसमें उनके पिता रामबिलास पासवान के पिता की अहम् भूमिका रही है। उनके पिता बिहार की राजनीति में दिग्गज नेता माने जाते थे। लोग उन्हें मौसम विज्ञानी भी कहा करते थे। राम बिलास पासवान के बारे में यह कहा जाता था कि सरकार किसी भी दल की हो वो उसमे मंत्री जरूर रहते थे। केन्द्र में कांग्रेस की सरकार हो या एनडीए की चाहे जनता पार्टी की उनका मंत्री पद बरकरार रहता था। पढाई के बाद चिराग पासवान फिल्म इंडस्ट्री में जाना चाहते थे लेकिन वहां उनकी दाल नहीं। राम बिलास पासवान की पहुंच के कारण उन्होंने एक्टिंग में पैर जमाने की कोशिश की लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली।

चिराग पासवान ने पीएम मोदी का हनुमान बन कर खूब प्रचार ​किया

लेकिन 2014 के आम चुनाव में उन्हें घर की पार्टी लोजपा से टिकट मिला और वो जमुई से सांसद बन गये। इस तरह से चिराग पासवान ने राजनीति में डेब्यू कर दिया। उस समय राम बिलास पासवान की लोजपा एनडीए का सदस्य था। मोदी जी का रामबिलास पासवान पर विशेष रहमो करम रहता था। 2019 में भी चिराग पासवान ने जमुई से लोजपा के टिकट पर सांसद चुने गये। आज की तारीख में चिराग पासवान मोदी सरकार में मंत्री पद के दावेदार बन चुके है। उनके अंदर भी अपने पिता की तरह मौकों को अच्छी तरह भुनाने की कला जानते हैं। सत्ता को किस तरह हासिल किया जाता है उनके खून में है। बिहार के पिछले विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान ने पीएम मोदी का हनुमान बन कर खूब प्रचार ​किया था। भले ही उनकी पार्टी को वो सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। लेकिन आगामी लोक सभा चुनाव जीतने के लिये क्षेत्रीय दलों को एनडीए में जोड़ने के लिये दावत दी है। सभी लालची और बेइमान दल एनडीए में शामिल होने के लिये बेकरार हो रहे है। ये नेता जानते हैं कि सरकार में शामिल होने का मौका मिल गया तो दस माह में जमकर कमाई कर का मौका मिल जायेगा।
2010 में चिराग फिल्मों में संघर्ष कर रहे थे
पढ़ाई करेन के बाद चिराग का रुझान बॉलिबुड की ओर था। उनके पिता लोजपा अध्यक्ष राम बिलास पासवान ने राजनीतिक रसूख के बल पर चिराग के लिये दो फिल्मों का इंतजाम कर दिया था। उनकी पहली फिल्म 2010 मिले न मिले हम रिलीज हुई जो बाक्स आफिस पर कुछ भी करिष्मा नहीं दिखा पायी। इस फिल्म में उनके अपोजिट कंगना रनौत थी। चिराग की अगली फिल्म 2011 में वन एण्ड ओनली फिल्म रिलीज हुई। इस फिल्म में भी कंगना रनौत हीरेाइन थीं। लेकिन इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद नहीं किया। अच्छी शक्ल सूरत और पर्सनैलिटी रखने वाले चिराग पासवान को फिल्म इंडस्ट्री ने जगह नही दिया। तभी चिराग पासवान ने यह फैसला कर लिया किया कि बॉलिवुड में काम करना उनके बस में नहीं है। उसके बाद ही उन्होंने राजनीति में जाने का मन बना लिया और आज वो राजनीति में स्थापित नेता हैं।
भाजपा के सहारे 2 सांसद बने चिराग बन गये
2014 में चिराग पासवान लोजपा के टिकट पर जमुई से चुनाव लड़े और नरेंद्र मोदी के जादू से सांसद बन गये। तब से वो पीएम मोदी के अनन्य भक्त हो गये। इस बात से यह बात सिद्ध हो गयी कि अगर आपका राजनीति में कोई गॉड फादर है तो आप आसानी से राजनीति में छा सकते है। ये बात और है कि जिस तरह भाजपा ने लोक जनशक्ति पार्टी को तुड़वाया और उनके चाचा को केन्द्रीय मंत्री बनाया साफ हो गया कि भाजपा केवल यूज एण्ड थ्रो का सिद्धांत पर चलती है। बीजेपी भी समय पड़ने पर गधे को मौका बनाने से नहीं चूक रही है।

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