400 पार या सत्ता से बाहर
आम चुनाव में सिर्फ डेढ़ माह का समय ही रह गया है। हवा में भाजपा व एनडीए का नारा 400 पार गूज रहा है। वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन भी पूरी एकता के साथ चुनाव में कड़ी टक्कर देने में जुट गया है। लेकिन महाराष्ट्र बिहार और हरियाणा में भाजपा के लिये शुभ संकेत नहीं है। इन प्रदेशों में पिछले आम चुनाव में एनडीए को 98 सीट्स एनडीए को मिली थीं। लेकिन आज के परिवेश में हालात बिगड़ गये है। इसके साथ एनडीए से शिवसेना, जेजेपी अकाली दल, पीडीपी, टीडीपी ने एनडीए से नाता तोड़ लिया है। इसलिये भाजपा का 400 पार का नारा खोखला लग रहा है। ऐसा ही कुछ हाल हरियाणा में है पिछली बार दस की दसों सीट पर भाजपा के हिस्से में आयी थीं। वहां वर्तमान में मनोहर लाल खट्टर की सरकार चल रही है। जेजेपी भी इस सरकार में शामिल है। लेकिन अब वहां के समीकरण उलट गये हैं। यहां भी सीटों का गणित उलट सकता है।

हरियाणा में भी सत्ता का संकट
हरियाणा में भाजपा दूसरी बार सत्ता में आयी है। यहां भाजपा और जेजेपी की मिलीजुली सरकार चल रही है। वहां सीएम मनोहर लाल खट्टर हैं और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला हैं। लेकिन पिछले एक साल से सरकार में खींचतान चल रही है। इसके पीछे सांप्रदायिकता माहौल, किसान आंदोलन और राजनीतिक वजूद कारण बताये जा रहे हैं। अब ये मतभेद खुलकर सामने आ गये हैं। बताया जाता है कि जेजेपी और भाजपा में अनबन राजस्थान चुनाव के दौरान से चल रही है। जेजेपी राजस्थान विधानसभा चुनाव में 30 सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही थी लेकिन इसके लिये सहमति नहीं बनी। जेजेपी को वहां कोई सफलता नहीं मिली। अब आम चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर दोनों के बीच मतभेद और भी बढ़ गये हैं। भाजपा हरियाणा में अकेले ही आम चुनाव में उतरना चाहती है वहीं जेजेपी का कहना है कि उसकी पार्टी को भी गठबंधन के हिसाब से सीट मिलनी चाहिये। जब बात नहीं बनी तो जेजेपी ने साफ कर दिया कि अब वो गठबंधन सरकार से समर्थन ले सकते हैं। जेजेपी आम चुनाव में अब वो दसों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मन बना चुकी है।

बिहार अपडेट—एनडीए को झटका और इंडिया को बढ़त!
बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी देखी जा रही है। मीडिया में सबसे बड़ी खबर गर्मा रहीहै कि आरजेडी के दिग्गज नेता तेजस्वी यादव और चिराग पासवान के बीच मीटिंग हुई उसके बाद से ही मीडिया में यह चलने लगा कि तेजस्वी और चिराग के बीच खिचड़ी पक रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ बड़ा होने जा रहा है। इसके साथ ही आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए में घुटन महसूस करने लगे हैं। इस बात का पता इस बात से चलता है कि पीएम मोदी की हाल की रैली में ये दोनों ही नेता शामिल नहीं हुए थे। ये सब एक माह के भीतर ही यह बदलाव देखने को मिल रहा है। यह भी सुनने में आ रहा है कि महागठबंधन की ओर से चिराग पासवान को बिहार में आठ सीट और यूपी में 2 सीट देने का आफर दिया है। जबकि एनडीए से उन्हें सिर्फ एक सीट ही मिलने के आसार हैं।
चिराग और उपेंद्र कुशवाहा में रोष
आम चुनाव होने में दो माह से कम का समय रह गया है। अभी तक एनडीए में सीट शेयरिंग का फैसला भी नहीं हुआ है। ऐसे हालात में लोगों में चर्चा है कि एनडीए में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। छोटे क्षेत्रीय दल भाजपा के रवैये से नाराज होते दिख रहे है। हम प्रमुख जीतनराम मांझी और वीआइपी प्रमुख मुकेश सहनी भी खुश नहीं दिख रहे हैं। जब तक नितीश कुमार एनडीए में नहीं थे तो मोदी शाह उनकी मांग अनुरूप लोकसभा चुनाव में सीट देने को राजी थे लेकिन अब उनके व्यवहार में रूखापन देखने को मिल रहा है। वैसे भी चिराग पासवान और नितीश कुमार के बीच छत्तीस का आंकड़ा जग जाहिर है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने नितीश कुमार के खिलाफ काफी तीखी बयानबाजी की थी। उस वजह से नितीश कुमार की पार्टी जदयू को काफी झटका लगा था। वो जनसभाओं में खुलकर कहते थे कि वो मोदी के हनुमान हैं। चिराग आज भी नितीश कुमार को पचा नहीं पा रहे है। जबकि दोनों ही इस समय एनडीए के घटक दल है। चिराग मानते हैं कि उनकी पार्टी को तोड़ने में नितीश कुमार का प्रमुख हाथ था।
महाराष्ट्र में सियासी समीकरण बिगड़े
महाराष्ट्र में पिछले आम चुनाव में एनडीए को 43 सीटें मिलीं थी। तब शिवसेना और भाजपा एक साथ मिलकर आम चुनाव लड़ीं थीं। लेकिन इस बार शिवसेनना एनडीए से बाहर है और उसके मुकाबले चुनाव में है। इसके अलावा कांग्रेस और एनसीपी भी चुनावी मैदान में हैं। साथ ही ये तीनों पार्टियां महाविकास अघाड़ी की सरकार भी चला चुकी है। उसका नेतृत्व ऊद्धव ठाकरे ने किया था। आज भी तीनों पार्टियां एकजुट हो कर इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनी हुई है। इससे साफ हो गया है कि इस बार एनडीए को पुरानी वाली सीटें मिलना मुश्किल हैं। पिछली वाली सफलता मिलता नहीं दिख रहा है। इसके अलावा वहां सरकार में शामिल शिवसेना शिंदे गुट और अजित पवार एनसीपी भी टिकटों को लेकर भाजपा से टकरा गये हैं।
भाजपा से नाराज हैं अजित पवार और सीएम शिंदे
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा एक तरफ 400 पार का नारा लगा रही है। लेकिन अभी तक एनडीए में अपने साहयोगी दलों के साथ टिकटों के वितरण पर राजीनामा तक नही हुआ है। महाराष्ट्र में तीन दलों के गठबंधन की सरकार चल रही है। भाजपा के अलावा एनसीपी अजित गुट के अलावा शिवसेना शिंदे गुट में खींचतान मची हुई है। 2022 में शिवसेना के बागी मंत्री विधायक शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी सरकार को अपदस्थ करवाते हुए सरकार बना ली थी। इतना ही नहीं 56 साल पुरानी शिवसेना के भी देो भाग करवा दिये गये। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के इशारे पर चुनाव आयोग ने शिवसेना का लोगो और चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट को अलाट कर दिया। पिछले साल भाजपा की शह पर एनसीपी के नेता अजित पवार ने पार्टी के 3 दर्जन विधायकों व 13 सांसदों समेत बगावत कर दी। महाराष्ट्र सरकार में अब भाजपा और शिंदे के साथ एनसीपी अजित पवार भी बतौर उप मुख्यमंत्री शामिल हो गये है। नया पेंच लोकसभा उम्मीदवारी को लेकर पड़ गया है।

शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि पिछली बार वो 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी इस बार भी वो उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जानकारी हो कि पिछली बार शिवसेना एक ही पार्टी थी। लेकिन वर्तमान में शिवसेना दो गुटों में बंट गयी है। ऐसा ही कुछ दावा एनसीपी अजित गुट ने भी कर डाला है कि वो 13 सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ेगी। वहीं भाजपा शिवसेना शिंदे गुट को 10 से 12 सीटें आफर कर रही है। इस पर शिंदे गुट तैयार नहीं है। अजित पवार गुट को चार से पांच सीट का आफर किया गया है। ऐसे में भाजपा की हालत खस्ता हो गयी है। महाराष्ट्र में एनडीए के आगे सीट शेयरिंग गले की फांस बन गयी है। फिलहाल इस समस्या से निपटने को अमित शाह ने बैठक भी की है।। लेकिन फिलहाल सीट शेयरिंग का समाधान नहीं हो सका है।








