आल्ट न्यूज के कोफाउन्डर मो.जुबेर को मिला साहसी पत्रकारिता और इमानदारी का शानदार इनाम। एएलटी के सस्थापक प्रतीक सिन्हा और जुबेर को सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था मे योगदान को नोबुल प्राइस को चुना गया है। यह भारतीय पत्रकारो के लिये एक ऐतिहासिक सम्मान की बात है। यह समाचार ऐसे समय में आया है जब देश मे निष्पक्ष ईमानदार और साहसी पत्रकारों को सरकार के इशारों पर प्रताडित और बेवजह परेशान किया जा रहा है। उन पर फर्जी मुकदमे चलाये जा रहे हैं क्यों कि वो सरकार की काली करतूतों का खुलासा कर रहे है।
आल्ट न्यूज वेबसाइट के फाउन्डर और सह संस्थापक प्रतीक सिन्हा और मो जुबेर वायरल हो रहे वीडियो और समाचारो की सत्यता की परख कर उनकी सच्चाई जनता के सामने लाते है। ऐसा करने से सत्ताधारी दल के नेताओ के झूठ की पोल खुल जाती और उनकी असलियत जनता के सामने आ रही थी। ऐसे में सत्ताधारी दल और दिल्ली पुलिस ने साजिशन मो जुबेर को इसी साल जून माह मे साइबर सेल मे पूछताछ के लिये बुलाया। पूछताछ के बाद उन्होंने एक नये मामले मे जुबेर को गिरफ्तार कर हिरासत मे ले लिये। यह सब बिना किसी पूर्व सूचना के किया गया। उनके वकील को भी एफआइआर की कॉपी नहीं दी गयी। जुबेर की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से उसे रिमांड पर ले लिया। यूपी पुलिस ने भी यूपी के कई जगहो पर जुबेर के खिलाफ मामले दर्ज किये। यूपी पुलिस जुबेर को मामलो की सुनवायी के लिये घुमाती रही है। इस पर जुबेर के वकीलो ने सुप्रीमकोर्ट मे बेल की अर्जी लगायी। लेकिन बहुत समय तक उनकी याचिका पर सुनवायी नहीं हुई। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने जुबेर को सशर्त जमानत दे दी। इस बीच आल्ट न्यूज और जुबेर की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया। उन पर टैरर फडिग मे सहयोग करने का भी केस चलाया जा रहा है।
जुबेर और प्रतीक सिन्हा को अतरराष्ट्रीय नोबुल पुरस्कार की जानकारी से ऐसे लोगों को काफी सहारा मिला है जो कि ईमानदारी से अपनी पत्रकारिता को अंजाम दे रहे हैं। इस पुरस्कार की घोषणा ऐसे वक्त में जब देश के प्रमुख मीडिया संस्थान सत्ता के आगे लेटे हुए है। दिन रात सत्ताधारी दल के नेताओं की चाटुकारिता मे जुटे हुए हैं। सत्ता से सवाल पूछने के बजाये उनकी तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं। ऐसे मे प्रतीक सिन्हा और जुबेर जैसे तमाम पत्रकारों पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रताड़ना के नये नये ​हथकंडे अपना रहे है।

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