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यूपी में दो तीन महीने में चुनाव होने है। इसलिये राजनीतिक दल एक दूसरे से गठजोड़ करने में लगे हैं। सत्ताधारी बीजेपी को हटाने के लिये एकजुट होने की तैयारी हो रही है। सपा प्रदेश में सबसे ताकतवर दल है इसलिये उससे जुड़ने के लिये समीप आ रहे हैं। पहले जयंत चौधरी अखिलेश से मिले। उसके बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने अखिलेश से मुलाकात कीं। यह सुना जा रहा है कि आप और सपा में गठजोड़ हो सकता है।
विधानसभा चुनाव में दो तीन माह का समय रह गया है। सभी प्रमुख दल ऐक्टिव मोड में आ गये हैं। बीजेपी को पूरा भरोसा है कि योगी के नुेृत्तव में भाजपा दोबारा सरकार बनाने जा रही है। लेकिन ऐसा ही भरोसा पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी दिखाया था। लेकिन वहां भी भाजपा ने शुरू से ही इस बात का दावा किया था कि इस बार 200 से अधिक सीट पर उनके उम्मीदवार जीतेंगे। लेकिन रिजल्ट आया तो 75 विधायक ही जीत सके। उसमें से भी आधा दर्ज विधायकों ने फिर से टीएमसी में वापसी कर ली है। इसके अलावा मुकुल रॉय और बाबुल सुप्रियो ने भी भाजपा को छोड़ टीएमसी को दामन थाम लिया है।
कुछ ऐसा ही विश्वास यूपी में भाजपा यूपी में भी दिखा रही हैं। अंडर करंट को भाजपा मान रही हहै यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होगी। पिछले दो सालों से योगी सरकार हर मामले में ध्वस्त होती दिखी। कोरोना काल में न तो मरीजों को अअस्पताल में बेड मिले और न ही एंबुलेंस। शव गंगा में बहते मिले। ऑक्सीजन की कमी का और भी बुरा हाल था। मीडिया में छपा तो मीडिया वालों पर दमन चक्र चलाया गया। व्यापारी, मजदूर, छा़त्र, उद्योगपति, शिक्षक समेत यूपीवासी ़त्रस्त हैं। पिछले एक साल से किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली बार्डर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं यूपी सरकार ने इन किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया बल्कि उनका अपमान ही किया। योगी और मोदी की शह पर किसानों को मवाली, खालिस्तानी, आतंकवादी तक कहा। किसान इस चुनाव में भाजपा और योगी सरकार के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराने पर उतारु हैं।
लेकिन सरकार इस बात केा मानने को तैयार नहीं है कि यूपी में किसी भी प्रकार की समस्या है। पुलिस की मनमानी इतनी बढ़ गयी है कि आम आदमी पुलिस की बर्बरता का शिकार बन रही है। योगी के गृहजनपद में कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता को होटल के अंदर पुलिस कर्मचारियों ने अवैध वसूली के चलते पीट पीट कर मार डाला। इसके बाद पुलिस की हिरासत में अल्ताफ की जान गयी। पुलिस का दामन दागों से भरता जा रहा है।
इन सब हालातों में यूपी में बीजेपी की वापसी आसान नहीं है। सरकार की गिरती साख को बचाने मेे लिये मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का भी ऐलान कर दिया है। लेकिन इस ऐलान से भी किसानों की नाराजगी दूर होने वाली नहीं है। किसान नेताओं का कहना है कि मोदी जी ने कानून वापस
लेने के समय किसानों से माफी तो मांगी लेकिन 700 से अधिक किसानों की शहादत हो गयी पीएम ने उनके लिये एक शब्द भी अफसोस जताया। ऐसे में यूपी में इस बार मोदी और योगी जोड़ी कुछ कमाल कर सकेगी इस बात में सच्चाई नहीं नजर आ रही है।

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