लगभग पौने दो माह पहले बॉलिवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने अपने मुंबई स्थित घर में खुदकुशी कर ली थी। अब उस खुदकुशी को उसके घर वाले हत्या बता कर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। सुशांत के पिता केके सिंह ने बिहार में एक मामला दर्ज कराते हुए रिया चक्रवती समेत आधा दर्जन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है। इस मामले में बिहार सरकार और बीजेपी जेडीयू खुलकार महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ उतर गयी है। कुल मिला कर बिहार में चुनाव को देखते हुए जेडीयू और भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बना कर जनता को बहलाने का प्रयास कर रहे हैं क्यों पिछले 15 सालों से सत्ता की कमान नितीश कुमार के हाथों में है। अफसोस की बात तो यह है जनता को आज भी बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर है। लोगों के मन से सीएम की सुशासन वाली छवि अब खत्म हो चुकी है अवाम समझ चुकी है कि नितीश कुमार सिर्फ सत्ता के भूखे हैं सत्ता के लिये पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस से हाथ मिलाये। लेकिन मतलब निकलते ही उस भाजपा से ताल​मेल बिठा लिये चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने भाजपा से कभी हाथ न मिलाने की बात कही थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में मोदी ने नितीश कुमार के डीएनए पर सवाल उठाते हुए हमला किया था।
दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वो किसी राजनीतिक दबाव में आने वाली नहीं है। मुंबई पुलिस की जांच सही दिशा में जा रही है। सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि चूकि बिहार में असेंबली चुनाव हैं इस लिये बिहार सरकार और बीजेपी इस मामले को तूल दे कर गंभीर मामलों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। इधर केन्द्र की मोदी सरकार ने भी बिहार सरकार की सिफारिश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
केन्द्र सरकार महाराष्ट्र में सरकार न बनने की वजह से अंदर ही अंदर खिसियायी हुई है। वह कोइ न कोई बहाना बना कर महाराष्ट्र सरकार पर हमला करने से नहीं चूक रही है। पहले महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना गठबंधन की सरकार थी। लेकिन इस बार शिवसेना ने चुनाव परिणाम के बाद इस बात की जिद ठान ली कि इस बार शिवसेना का नेता ही प्रदेश में सीएम होगा। यह बात हजम नहीं हुई और दोनों ही दल अपनी बात पर अड़ गये। भाजपा देवेंद्र फडणवीस को फिर से सीएम बनाना चाह रही थी। ये बात शिवसेना को बिल्कुल हजम नहीं हो रही थी। शिवसेना ने अपनी सरकार के लिये एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन कर सरकार बना ली। इस बात की बीजेपी को ​हरगिज उम्मीद नहीं थी। भाजपा के सामने सह थाली हटा ली गयी। तब से लेकर केन्द्र सरकार और प्रदेश भाजपा कोई मौका प्रदेश सरकार को घेरने से बाज नही आ रही है। पहले कोरोना महामारी को लेकर केन्द्र सरकार ने सौतेला व्यवहार अपनाया वहीं प्रदेश भाजपा
नेता महाराष्ट्र सरकार पर ताना मारने से बाज नहीं आ रहे हैं।
लेकिन अब सुशांत की मौत को भाजपा और जेडीयू बिहार असेंबली चुनाव में भुनाना चाह रहे है। बिहार में वो सभी राजनीतिक दल जो बिहार से ही आते हैं जनता की सहानुभूति लेने के लिये सुशांत के पिता के पास जा कर सांत्वना दे रहे है। लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान, राजद के नेता तेजस्वी यादव, बिहार सरकार में डिटी सीएम सुशील मोदी समेत सभी पार्टी प्रवक्ता सिर्फ एक ही काम कर रहे हैं जिससे सुशांत का मुद्दा गर्म रखा जाये। जेडीयू बीजेपी, आदि इस मामले को लेकर बिहारी जनता को अन्य मुद्दों से दूर रखने का काम कर रहे है। राजद कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल प्रदेश सरकार को कोरोना महामारी और बाढ़ की विकरालता पर घेर रही हैं।
एक बात तो साफ दिख रही है कि बिहार में आम जनता एक तरफ तो कोरोना जैसी महामारी का दंश झेल रही वहीं बाढ़ का रौद्र रूप भी सामनेआ गया है। जेडीयू और बीजेपी गठबंधन की सरकार दोनों मोर्चों पर पूरी तरह विफल दिख रही है। कोरोना की लड़ाई लड़ने में प्रदेश सरकार संक्रमित रोगियों के इलाज और कोविड सेंटर्स पर उचित व्यवस्था करने में पिछड़ती दिख रही है। लेकिन सत्ताधारी दलों के प्रवक्ता बिना किसी शर्म लिहाज के टीवी चैनलों पर अपनी सरकार के गुण्गान करने से बाज नहीं आते है। टीवी चैनल्स भी अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिये ऐसे टापिक पर बहस करते हैं। यह कहना बिल्कुल ठीक होगा कि वर मरे या कन्या पंडित को दक्षिणा से मतलब। सत्ताधारी दल के प्रवक्ता से बिहार में कोरोना और बाढ़ की स्थिति पर सवाल पूछा तो उन्होंने बड़ी ही चतुरायी से कहा कि कोरोना केवल बिहार में ही नहीं ये एक वैश्विक आपदा है केवल बिहार की सरकार से सवाल करना व्यर्थ में समय बर्बाद करना है।
अब सवाल नितीश कुमार से नहीं किया जाये तो क्या कांग्रेस या राजद से किया जाये। पिछले 15 साल से नितीश कुमार बिहार में सत्ता पर कुंडली मारे बैठे है। इस लिये सवाल तो नितीश और भाजपा से ही किया जायेगा। सवाल चूंकि काफी तीखा और चुभने वाला है इसलिये सत्ताधारी दल के नेता इस सवाल ये तिलमिला उठते है।
बिहार में सत्ता की कमान थामे राजनीतिक दल सुशांत को एक राष्ट्रीय मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस मुद्दे को चुनाव में इस्तेमाल करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। नितीश कुमार से केके सिंह मिल चुके है। यह भी सुनने में आ रहा है भाजपा और जेडीयू सुशांत के पिता और घर के अन्य सदस्यों को चुनावी सभाओं में भी ले जाने से नहीं चूकेंगे। दोनों दल के नेता कह रहे हैं एक बिहारी कलाकार की मौत में महाराष्ट्र सरकार लापरवाही कर रही है। सवाल यह उठता है कि यह सब जो हो रहा है वो सिर्फ बिहारी होने की वजह से हो रहा है। अगर वो बिहार से न होता तो केन्द्र सरकार सीबीआई की जांच कराती। क्या सीएम नितीश कुमार बिहार पुलिस को महाराष्ट्र पुलिस से पंगा लेने भेजती। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि पिछले साल जब गुजरात में बिहारियों को खदेड़ा जा रहा था तब नितीश कुमार और सुशील मोदी का अपने लोगों की चिंता क्यों नहीं हुई। जाहिर सी बात है कि वहां भाजपा की सरकार है गुजरात में मोदी और अमित शाह का बोलबाला है। नितीश कुमार की क्या मजाल कि गुजरात सरकार से सवाल जवाब कर सकें। मोदी शाह की शह पर ही तो बिहार में नितीश कुमार को फिर से सत्ता मिली है इस बात का एहसास नितीश कुमार को है।लॉकडाउन के दिनों में अन्य प्रदेश​ में रहने वाले मजदूरों की वापसी पर नितीश कुमार ने अढ़ियल रवैया क्यों अपना रखा था। केन्द्र सरकार ने जब मजदूरों के टिकट का पैसा मांगा तो इनकार क्यों किया था। साफ जाहिर है कि सुशांत की मौत से राजनीतिक दलों को कोई लेना देना नहीं है। इस मुद्दे को जनता के बीच लाने का एक ही मकसद है कि अन्य गंभीर समस्याओं से दूर रखना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here