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जैसे जैसे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो रही है कांग्रेस में अंदरूनी कलह मुखर होती जा रही है। कांग्रेस एक समस्या से उबर नहीं पाती है कि दूसरी समस्या सिर पर आ जाती है। राजस्थान में सरकार पर सकट आन पड़ा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के सबसे प्रबल दावेदार राजस्थान के सीएम अशोक गहलौत ने नया खेल रच दिया है। उन्होंने यह कह कर हड़कंप मचा दिया है कि वो अध्यक्ष पद के साथ राजस्थान के सीएम भी बने रहना चाहते हैं। उनके समर्थन में 80 से ज्यादा विधायकों ने इस्तीफे दे दिये हैं। साथ उन्होंने दिल्ली से गये वरिष्ठ काग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राजस्थान प्रभारी अजय माकन से मिलने को मना कर दिया। इससे दोनों ही नेता बैरंग वापस दिल्ली आ गये। उन्होंने काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी को लिखित रिपार्ट सौंप दी है। यह भी माना जा रहा है कि आला कमान अनुशासनहीनता के मामले में कांग्रेस विधायकों पर कार्यवाही भी कर सकती हैं। अब अध्यक्ष पद के लिये मल्लिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक, कमलनाथ, केसी वेणूगोपाल और मनीष तिवारी का नाम भी चर्चा में आ रहा है।
दरअसल सारा मामला राजस्थान के पूर्व उपमुख्य मंत्री सचिन पाइलेट को लेकर गर्माया है। अशोक गहलौत के दिल्ली जाने की बात पर पाइलेट ने यह बयान दिया कि मुख्यमंत्री पद के लिये मेरी दावेदारी बन रही है। बस इस बयान के बाद ही अशोक गहलौत ने यह कहा कि मैं सीएम पद के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष पद भी सभालूंगा। सचिन पाइलेट के दावेदारी वाली बात पर गहलौत समर्थक विधायकों ने साफ कह दिया कि वो पार्टी तोड़ने की साजिश करने वाले लोगो को समर्थन नही करेंगे। अब यह मामला सोनिया गाधी के सामने पेश किया गया है। अब सोनिया गाधी के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि वो अशोक गहलौत को किस तरह डील करे जिससे वो अपने विधायकों को समझाएं। राजस्थान मे काग्रेस के लिये हालात काफी गभीर हो गये है। आगे कुआं और पीछे खाई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रेस में अब तक अशोक गहलौत सबसे आगे चल रहे थे। लेकिन राजस्थान कांड के बाद अब लग रहा है कि गाधी परिवार की निगाह मे अशोक गहलौत की पहले वाली विश्वसनीयता नही रही है। इससे पहले जब भी कांग्रेस या गांधी परिवार के खिलाफ किसी ने आवाज उठायी उसका पुरजोर विरोध गहलौत ने किया है। हमेशा गांधी परिवार के हित में साथ रहे और पूरा समर्थन किया।
अशोक गहलौत श्रीमती सोनिया गाधी और गांधी परिवार के काफी करीबी माने जाते है। अन्य नेताओं के मुकाबले सोनिया गांधी अशोक गहलौत पर अधिक विश्वास करती थी। कई बार गहलौत अपनी काबिलियत साबित भी की। पिछले गंुजरात चुनाव में गहलौत प्रभारी थे। उनकी ही रणनीति से गुजरात में काग्रेस बीजेपी के मुकाबले खड़ी होने में सफल हुई। भाजपा को कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी थी। सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को राज्यसभा सदस्य बनवाने मे भी अशोक गहलौत ने जो कूटनीतिक चालें चली जिसकी वजह से बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को हार का मुह देखना पड़ा और अहमद पटेल राज्यसभा में पहुंच गये। इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि गहलौत कांग्रेस के चाणक्य की भूमिका में है।

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