गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के लाल किले पर कुछ अति उत्साही लोागो ने मीनार पर धार्मिक झण्डे को फहरा दिया। वहां तैनात सुरक्षा बल ऐसे लोगो को रोकने में नाकाम रहा। आनन फानन में सुरक्षा बल ने उन युवको पर काबू पा धार्मिक ध्वज को हटा दिया। इस घटना को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। कुछ लोग इस घटना को किसान आंदोलन से जोड़ कर देख रहे हैं तो किसान नेता यइ कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि जिन लोगो नें इस घटना को अंजाम दिया उनका आंदोलन करने वाले लोगों से कोई वास्ता नहीं है। लेकिन अप्रिय घटना तो हुई इसका जिममेदार कौन है। देश की ज्यादातर मीडिया यह दिखा रही है कि इस घटना से तिरंगे का अपमान हुआ है जब कि ऐसा हरगिज नहीं हुआ है। बहुत ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं कि जिसमे साफ दिख रहा है कि जहां युवकों ने धार्मिक ध्वज लगाया है वहां कोई भी तिरंगा नहीं फहराया गया है। तिरंगा झण्डा तो उससे काफी ऊंचाई पर पीएम ने फहराया है। इस सबसे साफ जाहिर हो रहा है कि मीडिया के कुछ बड़े हाउस किसानों के सिर इस घटना का ठीकरा फोड़ना चाह रहे हैं। यह भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कि जिस युवक ने धार्मिक निशान लाल किले की मीनार पर लगाया है उसका नाम दीप सिद्धू है। वह पंजाब भाजपा का नेता बताया जा रहा है।

यह भी जानकारी में आया है कि दीप सिद्धू भाजपा का प्रभावी नेता है जिसके तार पीएम मोदी और दिग्गज भाजपाइयों ेसे जुड़े हैं। दीप के मोदी के साथ वाले फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। 2019 के आम चुनाव में ऐक्टर सनी द्योल ने पंजाब के गुरदासपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा था उस दौरान दीप सिद्धू ने सनी के प्रचार की कमान थाम रखी थी। सनी को भी दीप पर काफी भरोसा था। हर जगह दीप उनके साथ रहता था। लेकिन आज सनी ने बयान दे कर उससे कोई संबंध न होने की बात कह रहे है।

यह भी पता चला है कि झण्डा लगाने के लिये दीप सिद्धू सबसे ज्यादा आतुर और आगे था। जब वो लाल किले की मीनार पर चढ़ रहा था तो नीचे से कुछ लोगों ने उसे तिरंगा दिया जिसे उसने नीचे फेंक दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि वो किसी योजना के तहत सिान आंदोलनकारियों के बीच आया था और किसानों को साजिशन फंसाना चाह रहा था। उसकी इस हरकत से सब लोगों के दिमाग में यही आता कि  लाललिे पर धार्मिक निशान लगाने वाले आंदोलनकारी हैं। यह आंदोलन को बदनाम करने की और साजिश को अंजाम दिया गया था। किसान नेता राकेश टिकक्त ने साफ कह दिया कि दीप सिंह सिद्धू का उसके साथियों का उनके आंदोलन से कोई वास्ता नहीं है।

 

 

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