किसानों के आंदोलन का प्रभाव धीरे धीरे पूरे देश में बढ़ने लगा है। इसका प्रभाव यूपी में भी साफ दिखने लगा है। बीजेपी सरकार और मंत्री इस बात को माने या न मानें लेकिन जनता ने नताओं को जवाब देना शुरू कर दिया है। ऐसा ही एक वाकया यूपी के संभल जिले में देखा गया जहां भाजपा के एक दिग्गज नेता कृषि कानूनों के समर्थन में अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे वहां गांव वालों ने उनका बहिष्कार करते हुए दौड़ाया। इतना ही नहीं नेताजी को काले झण्डे दिखाते हुए भाजपा विरोधी नारे भी लगायें। पुलिस ने किसी तरह गांव वालों को शांत कराया। नेता जी को उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा।
पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के दौरान भले ही नेशनल मीडिया किसान आंदोलन की कवरेज नही कर रहा हो लेकिन आंदोलन पर इसका कोई असर नहीं होता हुआ दिख रहा है। काफी समय गुजर जाने के बाद भी कृषि कानूनों को वापस नही लिए जाने की वजह से बीजेपी के खिलाफ किसानो का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। विशेष तौर पर पंजाबए हरियाणा और पश्चिमी उत्तर.प्रदेश और राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी का विरोध बढ़ता जा रहा है।

उतर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को भी अपने दौरे के दौरान किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा हैए और वापस भगाना बड़ा स्वतंत्र.देव.सिंह को संभल के ग्राम मानिकपुर की मड़इयां के सामने किसानों के विरोध का सामना करना पड़ाण् इस दौरान उन्हें काले झंडे दिखाए गए और वापस जाओ के नारे लगाकर विरोध किया गया।

किसानों ने इस दौरान कृषि कानून वापस लो के नारे लगाए गए। किसानों के विष्रोध.प्रदर्शन के बीच पुलिस भी पहुंची लेकिन किसानों की संख्या देखकर पुलिस के भी हाथ पांव फुल गएए और पुलिस ने शांति से प्रदर्शनकारी किसानो को शांत करवाया। विष्रोध प्रदर्शन के दौरान किसानों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच नोंकष्झोंक भी हुईए हालांकि बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मामले को बिगष्ड़ने से पहले सम्भाल लिया।

 

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