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पिछले चार पांच साल में कांग्रेस के 170 विधायाकों ने पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थामा है। किसी अन्य दल के विधायक पार्टी छोड़ कर नहीं गये है। बीजेपी के मात्र 19 विधायकों ने ने पार्टी छोड़ी है। अगले साल यूपी, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। उपरोक्त सभी प्रदेशों में बीजेपी की हालत खराब दिख रही है। खासतौर से यूपी, गोवा, और उत्तराखंड में तो भाजपा को अपनी सत्ता बचाने में भी लाले पड़े हुए है। यूपी में तो हालात यह हैं कि सत्ता हाथ से फिसलती जा रही है लेकिन इसे कैसे नियंत्रण मे ंकिया जाये समाधान खोजा जा रहा है। वर्तमान सीएम योगी की न तो मोदी से बन रही है और न शाह से। पार्टी अध्यक्ष नड्डा भी योगी से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। लेकिन ऊपरी मन से यह प्रचार किया जा रहा है कि आॅल इज वैल। उत्तर प्रदेश में साफ नजर आ रहा है कि बीजेपी दो खेमों में बंट गयी है। कुछ लोगों को योगी पर विश्वास है तो कुछ लोग योगीी को दोबारा सत्ता में देखना नहीं चाह रहे है। योगी अािदत्यनाथ पर यह आरोप है कि वो पिछड़ावर्ग और ब्राह्मणों के खिलाफ है। स्वजाति के पक्षधर हैं यही वजह है कि ब्राह्मण समुदाय के मजबूत करने के लिये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद को भाजपा में लाये है। यह बात दीगर है कि ब्राह्मणों के एकजुट रखने में जितिन प्रसाद कितने सफल हो पाते हैं। कांग्रेस में रहते हुए जितिन प्रसाद यूपी में कुछ खास नहं कर सके हैं। यहां तक कि वो दो बार से अपनी लोकसभा की सीट नहीं निकाल सके है। पंचायत चुनाव में भी वो कुछ करिश्मा नहन ही कर सके। 2004 में वो लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंचे। इसमें भी उनके पिता जीीतेन प्रसाद की भूमिका रही। 2009 में मनमोहन सिंह सरकार में उन्हें मंित्रमंण्डल में जगह मिली। जितिन प्रसाद आगामी चुनाव में भाजपा की मंशा को कितना पूरा कर पाते हैं यह आने वाला समय बतायेगा। भाजपा ने इसी कड़ी में 1985 बैच के आईएएस अनूप चंद्र पाण्डे को चुनाव आयोग का अध्यक्ष बना दिया है। लोगों का मानना है कि यह सब ब्राह्मण लाॅबी को मजबूत करने के लिये किया गया है। ताकि मौका पड़े तो योगी पर नियंत्रण लगाया जा सके।
इससे यह साफ जाहिर है कि कांग्रेस की अपने नेताओं विधायकों और सांसदों पर कितनी पकड़ है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 80 विधायक चुन गये थे। लेकिन 2019 में हुए आम चुनाव में गुजरात में एक भी कांग्रेसी नेता सांसद नहीं बन सका। यह भी कहा जा सकता है कि गुजरात में कांग्रेस की अपनी कोई छवि नहीं है। उम्मीदवार अपनी मेहनत और साख के चलते जीत रहे है। पार्टी उन्हें बांध कर रखने में सफल नहीं है। ये भी कह सकते हैं कि पार्टी नेतृत्व के अभाव में पुरान और विश्वसनीय नेता कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो रहे है।
दूसरी ओर यह भी कहा जा सकता है कि भाजपा को भी अपने नेताओं पर भरोसा नहीं रहा है इसलिये वो कांग्रेस के विधायकों को अपनी पार्टी में लोने को तत्पर रहती है। देश में चुनाव कोई भी भजजपा ने हमेशा कांग्रेस के बागी नेताओं के बल पर जीता है। चाहे वो कर्नाटक इई प्रदेशों में तो भाजपा ने अपनी सरकारें बागी विधायकों के सहारे बनाई है। कर्नाटक हो या मध्य प्रदेश दोनों जगह पर भाजपा ने कांग्रेसी नेताओं को बागी बनने पर मजबूर कर अपनी सरकारें बनायी हैं।

 

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