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पिछले एक सप्ताह में बिहार पॉलिटिक्स की काफी चर्चा चल रही है। हर कोई नितीश कुमार के बारे में फब्तियां कस रहा है। यह कहा जा रह है कि वो मौका परस्त हैं सवाल यह उठना चाहिये कि राजनीति में कौन मौका परस्त नहीं हैं। पीएम मोदी मौका परस्त नहीं हैं जो नितीश कुमार को एनडीए में लाने को बेकरार नहीं थे। पिछले डेढ़ साल से नितीश कुमार के खिलाफ साजिश करने में बीजेपी जुटी हुई थी। सम्राट चौधरी आज जो डिप्टी सीएम बने हैं क्या क्या नहीं कहा उन्होंने सीएम नितीश कुमार के खिलाफ। आज वहीं उनके सीएम बने हैं। अमित शाह ने हाल ही की जनसभा में यह कहा था कि बिहार के लोग कान खोल कर सुन लें कि समय आने पर नितीश कुमार की एनडीए में एन्ट्री बैन हो गयी है। भाजपा के दरावाजे नितीश कुमार के लिये हमेशा के लिये बंद हो गये हैं।

कभी गालियां बकने वाले लोग नितीश की तारीफ में जुटे
इसके अलावा बिहार के भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद, विजय कुमार सिन्हा, यहा तक कि पीएम मोदी भी नितीश कुमार को गालियां देने से बाज नहीं आते थे। वहीं पीएम मोदी और क्या इन्हें कोई पल्टूराम कहेगा। केवल ये बात केवल नितीश कुमार पर ही क्यों लागू हो रही है। यह माना जाये कि बिहार में भाजपा दूसरे दलों के नेताओं के सहारे ही सत्ता पाने को बेकरार है। वर्तमान बीजेपी अघ्यक्ष सम्राट चौधरी भी राजद के नेता हैं जिन्हें बीजेपी ने सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया है। ये बात सच है कि बिहार में भाजपा में लालू, नितीश और तेजस्वी जैसे नेताओं के मुकाबले कोई नेता नहीं हैं।

एकनाथ शिंदे, अजित पवार और छगन भुजबल भी विभीषण
गद्दारी करने में फिलहाल ऐसा कोई राजनीतिक नहीं है जहां ये लोग नहीं हों। शिवसेना को धोखा देने वाले एकनाथ शिंदे राजनीति में आने से पहले ठाणे में ऑटो चलाते थे। बाला साहब की नजर क्या पड़ी कि उनकी जिंदगी ही बदल गयी। आज वो महाराष्ट्र के सीएम बने हुए हैं। भले इसके लिये उन्हें अपनी ही पार्टी से गद्दारी ही करनी पड़ी। उसी विभीषण के चलते आज शिवसेना के दो टुकड़े हुए। भाजपा की शह पर ही चुनाव आयोग ने असली शिवसेना को नकली साबित कर दिया। असली शिवसेना सुप्रीमकोर्ट में दर दर भटक रही है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस का विभीषण
2020 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार चल रही थी। सीएम कमलनाथ इतने बेखबर थे कि कब उनकी सरकार के मंत्रियों व विधायकों में सेंध लग गयी कि पता ही नहीं चला। वहीं कांग्रेस के गददार पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने घराने की परंपरा को बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को धराशायी कर दिया। इसके अलावा भाजपा की सरकार को स्थापित कराने में अहम् भूमिका निभाई। सिंधिया राजघराना गद्दारी के लिये पहले भी जाना जाता है। सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के काफी करीब थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राहुल प्रियंका और सोनिया गांधी के काफी माने जाते थे।








