नयी दिल्ली। महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के परिणाम आने के 15 दिन बाद भी सरकार बनने के आसार नजर नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के राज्यपाल ने केन्द्र को चिट्ठी लिख कर प्रदेश मे राष्ट्रपति शासन लगाने की बात कह दी है। केन्द्र सरकार इस सिफारिशी चिट्ठी को राष्ट्रपति के पास भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगी। दूसरी ओर शिवसेना ने राज्यपाल के इस फैसले के विरोध में सुप्रीमकोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के दबाव में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है।
पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिये शिवसेना ने जोड़
तोड़ में लग गयी थी। एनसीपी और कांग्रेस की ओर उन्होंने हाथ बढ़ाने का
प्रयास शुरू कर दी। शुरू में ऐसा लग रहा था कि इन तीनों के गठबंधन से
प्रदेश में सरकार बनने जा रही है। शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में सोनिया गांधी से संपर्क किया जा रहा था। यह बात तक सुनाई पड़ा कि सोनिया गांधी और उद्धव ठाकरे की फोन पर समर्थन के लिये बात भी हुई लेकिन सोमवार को जब शिवसेना राज्यपाल के पास पहुंची तो उसके पास किसी भी सहयोगी दल के समर्थन की चिट्ठी नहीं थी। ऐसे में उन्होंने राज्यपाल से 48 घंटे की मोहलत मांगी लेकिन उन्हें सिर्फ 24 घंटों की ही मोहलत दी गयी। शिवसेना ने राज्यपाल पर यह आरोप लगाया कि बीजेपी को गवर्नर ने 48 घंटों की मोहलत दी थी लेकिन शिवसेना को 24 घंटे ही दी गयी है।
इधर कांग्रेस ने भी शिवसेना को समर्थन देने में कोई ज्यादा दिलचस्पी नहीं
दिखाई। उसका कहना है कि उनको तो जनता ने सरकार बनाने का मौका नहीं दिया है। एनसीपी और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ा था तो एनसीपी के अकेले शिवसेना को समर्थन देने का कोई मतलब नहीं बनता था। सोमवार की रात में ही राज्यपाल ने तीसरे बड़े दल एनसीपी को सरकार बनाने के लिये इनवाइट किया कुछ नेता राज्यपाल से मिले भी। उन्हें भी 24 घंटों का समय दिया गया था। लेकिन एनसीपी ने अपने निर्धारित समय से पहले ही राज्यपाल को लिखकर दे दिया कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा नहीं अत: वो सरकार नहीं बना सकते है।
उसके बाद राज्यपाल ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के लिये सिफारिशी
चिट्ठी लिख दी है।