modi in kedarnath
After a long traveling and election convasing PM Modi shon their religous face and breaking the rules

नयी दिल्ली। पीएम मोदी सुर्खियों में बने रहने के लिये कोई भी मौका नहीं छोड़ते है।ं 17 मई को सातवें चरण के मतदान के लिये प्रचार खत्म करने के बाद मोदी ने यह प्रचार करवाया कि वो 18 और 19 मई को बद्रीनाथ और केदारनाथ में साधना और दर्शन करेंगे। इस बात को सभी समाचार चैनलों ने लाइव खूब अच्छी तरह प्रचारित किया। ऐसा करके न केवल पीएम मोदी ने आचार संहिता का उल्लंघन किया बल्कि टीवी चैनलों ने भी मोदी महिमा मंडन कर मोदी का भरपूर साथ दिया। चुनाव आयोग भी आंख बंद कर मोदी की नौटंकी को देख रहा है। 19 तारीख को सातवें चरण के चुनाव में 59 सीटों पर वोटिंग हो रही है वहीं मोदी को कवर करने के लिये देश के सभी टीवी चैनल बढ़चढ़ कर केदारनाथ और बद्रीनाथ पहंुचे। ये उस समय हो रहा है कि चुनाव प्रचार की प्रक्रिया पर आयोग की ओर से प्रतिबंध लग चुका है। इस मामले को लेकर टीएमसी ने मोदी के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत की है। चुनाव आयोग ने टीएमसी की शिकासत अपने यहां दर्ज कर ली है लेकिन क्या और कब कार्रवाई करेगा इसका कोई भरोसा नहीं दिया। वैसे भी आजतक मोदी और शाह के खिलाफ जितनी भी आयोग में शिकायतें की गयी हैं। उसमें आयोग ने क्लीन चिट ही दी है। चूंकि सभी चरणों के मतदान संपन्न हो चुके हैं इसलिये मोदी के खिलाफ की गयी शिकायत पर कार्रवाई सिर्फ खानापूरी होगी।
टीएमसी के सांसद डेरेक ओब्रायन ने चुनाव आयोग को लिखित चिट्ठी में लिखा है कि सातवें चरण के लिये सिर्फ प्रचार करने का प्रतिबंध है लेकिन आचार संहिता 23 मई के बाद समाप्त होगी तब तक नयी सरकार की तस्वीर साफ हो चुकी होगी। लेकिन पीएम मोदी केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा के दौरान जिस तरह से मोदी मीडिया से मुखातिब हो कर अपना अनैतिक और संविधान के खिलाफ प्रचार करने में जुटे हैं। उस पर चुनाव आयोग ने क्यों नहीं प्रतिबंध लगाया है। 17 मई के बाद चुनाव आयोग ने सातवें चरण के लिये प्रचार पर रोक लगा दी थी फिर मोदी सार्वजनिक रूप से मीडिया कवरेज कैसे करवा रहे हैं। चुनाव आयोग की यह कैसी निगरानी है कि सत्ताधारी दल की सभी गैरकानूनी हरकतों पर पर्दा डालने का काम कर रहा है।
यह भी कहा जा रहा है कि जब यह मोदी की निजी यात्रा है तो वो सरकारी विमान का इस्तेमाल कैसे कर रहे है। मोदी ने ही एक चुनावी रैली में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी सरकार के दौरान नेवी के जहाज पर अपने मित्रों के साथ पिकनिक मनायी थी। लेकिन मोदी के बयान के कुछ घंटों के बाद ही तत्कालीन नेवी के चीफ एडमिरल रामदास ने यह बयान दिया कि राजीव गांधी की वो आधिकारिक यात्रा थी मोदी जी का यह बयान पूरी तरह झूठा है। जब मोदी राजीव गांधी पर झूठा आरोप लगा सकते हैं तो विपक्ष भी मोदी की इस यात्रा पर सवाल उठा सकता है। विपक्षह का मानना है कि चुनाव आयोग मोदी और उनकी सरकार के आगे कुछ भी हैसियत नहीं रखता है। अगर हम पूर्व सीईसी टीएन शेषन को याद करें तो आज के मुख्य चुनाव आयोग सरकार के आगे बिल्कुल लाचार और असहाय नजर आता है। श्री शेषन ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त थे जिन्होंने दिग्गज से दिग्गज पार्टी और राजनेताओं को आचार संहिता को पालन करने पर मजबूर कर दिया था।

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