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Election Commission is not taking strict action against hate speech

विनय गोयल
नयी दिल्ली। किसी भी देश में चुनाव आयोग की भूमिका काफी अहम् मानी जाती है। लेकिन वर्तमान में यह देखा जा रहा है कि राजनीतिक दल येन कन प्रकारेण सत्ता में आने को आतुर हैं। जो दल सत्ता में है वो दोबारा पावर में आना चाह रहा है वहीं विपक्षी दल एक जुट हो कर सत्ताधारी दल को किसी भी हालत में सत्ता से दूर करना चाहता है। ऐसे में सभी दल नैतिकता को भुला चुके हैं। देश की आॅटोनाॅमस बाडी भी अपना वजूद बरकरार रखने में असमर्थ है। बात करते हैं चुनाव आयोग की जिसे 2019 में निष्पक्ष और सहज चुनाव कराने का दायित्व मिला है वो भी सत्तादल के आभामंडल से प्रभावित दिख रहा है। इस चुनाव में जितनी हेट स्पीच दी जा रही है उतनी इतिहास में नहीं दी गयी हैं।
सरेआम मंच से सत्ताधारी दल के नेता विपक्षी नेताओं को मां बहन की गालियां देते हैं। किसी नेता की मां को बारगर्ल कहकर अमानवीय पीड़ा पहुंचायी जाती है। देश पर जान लुटाने वाले शहीद को सरेआम देशद्रोही कहा जाता हैे। पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाता है लेकिन चुनाव आयोग को कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। कार्रवाई के नाम चंद नेताओं के प्रचार पर दो या तीन दिन का बैन लगाने के सिवा कुछ नहीं किया है। हां दो एक नेताओं के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है वो भी विपक्षी दल पर। उन्हें सत्ताधारी दल के किसी भी नेता की बद्जुबानी, गाली गलौच या आचार संहिता की अवहेलना नजर नहीं आती है।
नौ अप्रैल को महाराष्ट्र के एक जिले में पीएम मोदी ने सेना के नाम पर युवाओं से अपने पक्ष में वोट डालने की अपील की थी। लगभग दो सप्ताह बीतने के बाद भी चुनाव आयोग ने उनके इस बयान पर कोई नोटिस नहीं दिया। चुनाव आयोग उस मामले अभी तक कुछ भी नहीं कर सका है। या यूं कहा जाये कि चुनाव आयोग मोदी के खिलाफ जांच करने और नोटिस देने की हिम्मत जुटा नहीं पा रहा है। गुजरात सरकार के मंत्री गणपत बसावा ने एक जनसभा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना कुत्ते के बच्चे से कर दी। लेकिन चुनाव आयोग के कानांे पर जूं नहीं रेगी। हिमाचल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सत्यपाल सत्ती ने चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी को मां बहन की गालियां दीं। लेकिन चुनाव आयोग को सुनायी नहीं दिया। आजतक सत्यपाल के खिलाफ आयोग ने कोई नोटिस सर्व नहीं किया है। सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली बीजेपी की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने तो सारी सीमाएं लांघते हुए मुबई 26/11 आतंकी हमले में शहीद आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे को देशद्रोही तक कह डाला। जब चुनाव आयोग की काफी आलोचना हुई तो एक एक कर के दो नोटिस दिये गये। लेकिन प्रज्ञा ठाकुर के लिये चुनाव आयोग के नोटिस कोई मायने नहीं रखते हैं। वो लगातार आचार संहिता का उल्लंघन करती घूम रही है। लेकिन उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गयी है। इन सब नेताओं के आगे आयोग निरीह बकरी की तरह मिमिया कर रह जाता है।
दूसरी ओर राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह का मामला है जिसके लिये चुनाव आयोग ने कार्रवाई की संस्तुति कर राष्ट्रपति के पास भेजी हे। उस पर राष्ट्रपति ने कोई निर्णय नहीं लिया है। कल्याण सिंह अलीगढ़ के एक समारोह में यह कहा था कि वो चाहते हैं कि मोदी फिर से पीएम बनें। यह उनकी पहली पसंद और इच्छा है। यह बयान देते समय वो भूल गये थे कि वो भाजपा कार्यकर्ता या नेता बाद में है पहले वो प्रदेश के राज्यपाल है। इस बात को लेकर विपक्ष ने काफी बवाल किया तो चुनाव आयोग ने स्थानीय डीएम ओर निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी जिसमे यह साबित हुआ कि कल्याण सिंह पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला बनता है। लेकिन कल्याण सिंह आज भी राजस्थान के राज्यपाल बने हुए हैं।
यूपी कौशाबी में सिटिंग एमपी विनोद सोनकर अपने इलाके के प्रधानों और कोटेदारों को सरेआम धमकाते हैं कि उन्हें वोट नहीं दिया तो अंजाम भुगतने को तैयार रहना। ये मत भूलना कि 23 मई के बाद भी प्रदेश में योगी की सरकार रहेगी। जीना हराम करवा दूंगा। इसे सलाह समझो या धमकी। अभी भी समय है संभल जाओ नही ंतो मुझे समझाना आता है। इसका वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है। लेकिन चुनाव आयोग कुछ भी करने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। बदायूं से बीजेपी उम्मीदवार और यूपी सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा तो इन सबसे दो कदम आगे हैं। उनका एक वीडियो सुर्खियों में है जिसमें अपने कार्यकता और समर्थकों से कह कह रही हैं कि एक भी वोट खराब नहीं होना चाहिये। यदि वोटर नहीं है तो उसकी जगह वोट डालो। चुनाव में इतना तो चलता है। लेकिन स्थानीय प्रशासन इस ओर से बिल्कुल निश्चिंत बैठा है।

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