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साकेत कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े महिला हमलावर गोली मार कर फरार हो जाते हैं और पुलिस मूक दर्शक बन कर खड़े रहते हैं। ये दिल्ली पुलिस और एलजी की लापरवाही का जीता जागता नमूना है। साल भीतर केार्ट परिसर में यह दूसरा गोली कांड है जिसमे गुंडे पुलिस की मौजूदगी अपराधियों ने अपनी ताकत का मुजाहिरा किया है। पिछले एक साल में दिल्ली में आपराधिक ग्राफ काफी बढ़ गया है। लेकिन दिल्ली पुलिस और एलजी विनय कुमार सक्सेना दन पर रोक लगाने में नाकाम दिख रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भरद्वाज ने कहा कि न्यूज पेपर में छपी खबर के अनुसार दिल्ली पुलिस ने फर्जी बिल तैयार कर 350 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।

कोर्ट परिसर में असलहधारी बदमाश घुसे कैसे
हैरानी वाली बात यह है कि कोर्ट परिसर में गन लेकर बदमाशोे की एन्ट्री किस तरह हो जाती है। जब कि हाई कोर्ट की सख्त गाइड लाइन है कि कोर्ट परिसर में कोई व्यक्ति असलहा लिये प्रवेश नहीं करना चाहिये। गेट पर ही मेटल डिटेक्टर आने वालों को जांच कर आने दिये जाते हैं। इतनी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद कोर्ट परिसर में बदमाश पुलिस की मौजूदगी में घुस कर गोलियां चला कर फरार हो जाते हैं। हर बार की तरह इस बार भी पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर फरार हो गये और पुलिस हाथ मलती रह गयी।
दिल्ली पुलिस ने बिलों में किया गया करोड़ों का घोटाला
श्री भरद्वाज का कहना है कि एलजी सक्सेना फर्जी मामलों का आधार बना कर दिल्ली सरकार के खिलाफ तुरंत सीबीआई को जांच करने की सिफारिश कर देते हैं। दिल्ली पुलिस की नाकामी और इस घोटाले के बारे में सीबीआई जांच के आदेश कब करेंगे। श्री भरद्वाज ने बताया कि एक आडिट की रिपोर्ट के आधार पर यह पता चला है कि गृहमंत्रालय से दिल्ली पुलिस के लिये 350 करोड़ रुपये का बजट पिछले साल आवंटित किया गया था। इस बजट को दिल्ली पुलिस में क्वालिफाइड बाहरी एक्सपर्ट्स को हायर करना था। लेकिन ऐसे कुछ साक्ष्य नहीं है जिससे पता ले कि दिल्ली पुलिस ने किस ऐक्सपर्टस को हायर किया है। जांच के दौरान पता चला कि उस बजट को विभाग के छोटे मोटे काम काजों में एडजस्ट किया गया। इतना ही नहीं काम काजों के बिल को वास्तविक बिलों से कई गुना बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है।








