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कांग्रेस की अंदरूनी कलह से आला कमान की सिरदर्दी बढ़ रही है। किसी तरह पंजाब में राजनीतिक गतिरोध को सुलझाया ही था कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के लिये संकट उत्पन्न होने लगा है। वहां भी सीएम अशोक गहलौत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पाइलेेेट के बीच में तलवारें खिंची हुई है। पिछले सप्ताह पाइलेट ने राहुल प्रियंका से दो बार मुलाकात की और अपनी समस्याओं को बताया। राहुल प्रियंका ने उनकी समस्याओं को सुना और समाधान निकालने का भरोसा दिलाया है। इसी माह राजस्थान सरकार में फेरबदल होना तय किया गया हैं। या उम्मीद की जा रही है कि सचिन पाइलेट के समर्थक विधायकों को सरकार में मंत्री बनाया जाये। उससे राजस्थान की कांग्रेस सरकार और पार्टी के बीच सामंजस्य बनने की पूरी उम्मीद की जा रही है।
पिछले साल अगस्त माह में सचिन पाइलेट अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली और हरियाणा चले गये थे। बाद में प्रियंका की बातचीत से सचिन अपने समर्थक विधायकों के साथ वापस जयपुर गये थे। इससे कांग्रेस और राजस्थान सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। इससे अशोक गहलौत और सचिन पाइलेट के बीच की तनातनी सार्वजनिेक हो गयी थी। बीजेपी ने भी पूरा जोर लगाया कि सचिन पाइलेट अपने समर्थक विधायकों समेत कांग्रेस को छोड़ दें। इसके लिये मोदी सरकार और भाजपा ने ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया। कुछ केन्दीय मंत्री भी इस काम के लिये तैनात किये थे। लेकिन भाजपा अपनी मंसूबों में कामयाब नहीे हो सकी। कांग्रेस ने किसी तरह राजस्थान की सरकार को बचा लिया। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी सचिन पाइलेट से किये गये वादे पूरे नहीं किये गये तो उन्होंने राहुल प्रियंका से मिलकर किये गये वादों को याद दिलाया है। इस बार शायद सचिन पाइलेट को कुछ न कुछ मिलना तय है। ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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