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Today youth are much aware for health issues. They are adopting whey protines

आज के समय में यह देखा जाता है कि बड़े शहरों में रहने वाले लोग अपनी
सेहत को लेकर काफी सतर्क रहते हैं। ऐसे में वो आस पास के जिम और बॉडी फिटनेस सेंटर में जाते हैं। वो भी ऐसे सेंटरों के चंगुल में फंस जाते हैं
जहां न तो उनको सही तरीके से एक्सरसाइज कराने के लिये ट्रेनर होते हैं और न ही डाइटीशियंस जो उन्हें एक्सरसाइज करने के सही तौर तरीके बताये जाते हैं। ऐसे में वहां जाने वाले युवा बिना किसी गाइडेंस के ही एक्सरसाइज करते हैं जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे युवा जल्द से जल्द एक बॉडी बिल्डर की तरह मसल्स बनाना चाहते हैं। उनकी इसी चाहत का नतीजा यह होता है कि उन्हें कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
यह भी देखा जा रहा है कि युवा पीढ़ी अपनी बॉडी किसी फिल्म के हीरो की तरह बनाना चाहते हैं ऐसे में वो लोग बिना किसी सलाह लिये इंजेक्शन और दवाइयों का सेवन करने लगते हैं जिनका असर उनके शरीर पर कुछ समय बाद पता चलता है।
इन्जेक्शन और अन्य दवाइयां लेने से कुछ समय बाद पेट खराब और दर्द की शिकायत होने लगती है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर इन्जेक्शन व ड्रग्स लेने वाले युवाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
आपको वही व्हे प्रोटीन ही लेनी चाहिये जो आपको आपका ट्रेनर सजेस्ट करे और उतनी मात्रा में लें जितनी कही जाये।

व्हे प्रोटीन्स लेने के फायदे और रिस्क

विदेशी स्वास्थ्य विशेषज्ञ और लेखक जोसेफ का मानना है कि अक्सर लोग सोचते हैं कि व्हे प्रोटीन ऐक्सरसाइज का ही एक हिस्सा है जो बॉडी की मसल्स को मजबूत बनाने का काम करता है। लेकिन वो सही रूप से नहीं जानते हैं कि व्हे प्रोटीन क्या है और किस तरह इस्तेमाल करना चाहिये। आइये हम जानते है कि आखिर व्हे प्रोटीन होता क्या है।

क्या है व्हे प्रोटीन्स

दूध में दो प्रकार के कैसीन और व्हे प्रोटीन पाये जाते हैं। दूध में से
व्हे प्रोटीन को कैसीन से सेपरेट कर लिया जाता है। बाकी दूध से हम पनीर
आदि बाई प्रोडक्ट बना सकते हैं वो भी सेहत के लिये अहम् होता है। व्हे
प्रोटीन में 9 अमीनो एसिड होते हैं जो हमारे शरीर के लिये काफी फायदेमंद
होते हैं। कई रिसर्च में पाया गया है कि व्हे प्रोटीन का सेवन करने से
हमारे शरीर के लिये काफी गुणकारी होता है। आज भी व्हे प्रोटीन्स पर
दुनियाभर के डाक्टर और वैज्ञानिक रिसर्च में जुटे हुए है।
व्हे सप्लीमेंट कैसे और कब लें
व्हे सप्लीमेंट को आप दूध या पानी के साथ भी ले सकते हैं। लेकिन कुछ
लोगों को दूध से अलर्जी होती है वो लोग पानी के साथ प्रोटीन शेक बना कर
पी सकते है। प्रोटीन को लेने का सबसे बेहतर समय सुबह का होता है जब आपका पेट खाली रहता है। ऐसे में व्हे सप्लीमेंट खाली पेट में एनाबोलिस्म और कैटाबोलिस्म के बीच अच्छा बैलेंस बनाने का काम करता है। खाली पेट में सप्लीमेंट अच्छी तरह से मेटाबोलिस्म और मसल्स को एक सही अनुपात में बनाये रखता है।
अधिकतर लोगों का मानना है कि व्हे प्रोटीन को वर्कआउट के बाद ही लेना
चाहिये क्योंकि वर्क आउट के बाद काफी कैलोरी खत्म हो जाती है ऐसे में
बॉडी को इनर्जी की जरूरत होती है। ऐसे में व्हे सप्लीमेंट आपकी बॉडी के
लिये बहुत जरूरी हो जाता है। लेकिन यह भी कहा जाता है कि जब भी आपको इनर्जी की कमी महसूस हो आप व्हे प्रोटीन को ले सकते हैं।

व्हे प्रोटीन से होने वाले फायदे

व्हे प्रोटीन का इस्तेमाल हम शरीर की मसल्स को मजबूत बनाने के लिये तो
करते ही हैं साथ इसके सेवन से बॉडी का अतिरिक्त वजन और मोटापे को भी कम कर पाते हैं। न्यूट्रीशियंस एण्ड मेटाबोलिज्म में छपी एक रिपोर्ट के
अनुसार 158 लोगों ने व्हे प्रोटीन का सेवन किया उनकी बॉडी का अतिरिक्त मोटापा और वजन भी कम पाया गया। उनकी मसल्स भी मजबूत और सुडौल पायी गयी।
विदेशी जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार व्हे प्रोटीन के इस्तेमाल से
कैंसर जैसे लाइलाज रोग पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। इस क्षेत्र में
और रिसर्च की जरूरत है।
द इंस्टीट्यूट आफ मेडिसिन ने एक मानक तय किया है कि 13 साल के बच्चे 34 ग्राम व्हे सप्लीमेंट, 46 ग्राम 14—18 साल तक की लड़कियों के लिये और इसी उम्र के लड़कों के लिये 52 ग्राम प्रोटीन ले सकते है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों को व्हे प्रोटीन लेने से परहेज करना चाहिये।

कोलेस्ट्रोल पर नियंत्रण

द ब्रिटिश जर्नल आफ न्यूट्रीशियंस में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट में यह कहा
गया है कि 70 ओवर वेट पुरुषों और औरतों को व्हे सप्लीमेंट 12 वीक तक दिया गया। इस बीच उनके कई मेडिकल टैस्ट हुए जैसे लिपिड और इंसूलिन लेविल। इनमे काफी सुधार देखा गया। इसके अलावा इन लोगों के कोलेस्ट्राल में काफी सुधार पाया गया।
अस्थमा से परेशान बच्चों के लिये भी व्हे प्रोटीन काफी फायदेमंद बताया
जाता है। द इंटरनेशनल जर्नल आफ फूड साइंसेज एण्ड न्यूट्रीशियंस में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 11 अस्थमा पीड़ित बच्चों को दिन में दो बार 10 ग्राम व्हे सप्लीमेंट नियमित रूप से एक माह तक दिया गया। इन बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता में काफी सकारात्मक सुधार पाया गया।

ब्लड प्रैशर और कार्डियोवेस्कुलर डिजीज

—इंटरनेशनल डेयरी जर्नल की रिसर्च में पाया गया कि व्हे प्रोटीन के सेवन से ब्लड प्रेशर के रोगियों को काफी
राहत मिलती है। यह भी देखा गया है कि हाइपर टेंशन और हार्ट डिजीज या स्ट्रोक्स के होने की आशंकाएं कम रह जाती हैं।
द जर्नल क्लीनिकल एण्ड इनवेस्टीगेटिव मेडिसिन में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट में पाया गया कि एचआईवी पाजिटिव पेशेंट को व्हे सप्लीमेंट देने से उसके
गिरते वजन में काफी सुधार देखा गया।

रिस्क और आशंकाएं—

अक्सर यह सुना गया है कि व्हे सप्लीमेंट की हाई डोज लेने वालों को
डाइजेशन की शिकायत होती है। पेट में दर्द व मरोड़ भी हो जाती है। कुछ
लोगों को दूध और व्हे सप्लीमेंट से एलर्जी भी होती है। इसके अलावा
सिरदर्द और थकान की भी शिकायत सुनने को मिलती हैं। हाई डोज की वजह से चेहरे पर मुंहासे आदि भी निकल आते हैं। एक न्यूट्रिशनल व्यू से देखा जाये तो व्हे सप्लीमेंट सामान्य तौर पर नहीं लेना चाहिये। यह प्राकृतिक रूप से मिलने वाले प्रोटीन्स का स्थान नहीं ले सकता है।

प्राकृतिक प्रोटीन बनाम व्हे सप्लीमेंट
सामान्य जीवन में प्रोटीन हमें दाल, दूध,अण्डे, मछली, चिकेन और बीफ से
मिलता है। लेकिन इसके लिये हमें अतिरिक्त समय और परिश्रम करना पड़ता है।
आज के समय में किसी भी आदमी के पास अतिरिक्त समय नहीं होता है जो बाजार में जा कर उपरोक्त वस्तुओं को खरीदे और उनको खाने के लायक तैयार करे। आज हर कोई टाइम शेड्यूल के तहत काम करता है। एक एक मिनट काउन्ट किया जाता है। ऐसे में किसी के पास दाल बनाने, आमलेट तैयार करने या नॉनवेज तैयार करने का वक्त ही नहीं है। ऐसे में लोग रेडी टू ईट या रेडी टू ड्रिंक को अपनाना ज्यादा सही समझते हैं।
ऐसे समय में युवावर्ग रेडी मेड व्हे प्रोटीन को अपनाने में रुचि रख रहे
हैं। इसके लिये सिर्फ उन्हें पानी या जूस की बॉटल में डाल कर शेक करना
होता है और बस उनका प्रोटीन उनके लिये सामने होता है। शेक कर तुरंत मुंह से लगाइये और इंस्टेंट प्रोटीन आपके शरीर के भीतर पहुंच जाता है। यही वजह है कि आजकल लोग रेडीमेड प्रोटीन को खरीदना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। मैट्रो सिटीज में प्रोटीन यूथ की जरूरत बन चुका है।

 

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