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ज्यौं ज्यौं आम चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं। कांग्रेस ने देश को जागरूक करने के लिये देश में फैल रही अराजकता को खत्म करने और आपसी भाई चारा को बनाये रखने के लिये भारत जोड़ो पदयात्रा का आयोजन किया है। इसका नेतृत्व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर रहे हैं। इस पदयात्रा की शुरुआत सोनिया गांधी के एक लिखित संदेश पढ़ने के साथ कन्या कुमारी से की गयी। सोनिया गांधी के संदेश में कहा गया कि देश में जो नफरत की आग पनप रही है उससे छुटकारा पाने और देश को गरीबी भुखमरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से उबरने के लिये भारत जोड़ो पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है।
इस यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर से की गयी है। इस यात्रा दौरान 3570 किमी की दूरी तय की जायेगी। इस पूरी यात्रा के दौरान राहुल गांधी मौजूद रहेंगे। लोगों मे यह उत्सुकता है कि क्या राहुल गांधी लंबी पदयात्रा कर पायेंगे। मुख्यधारा का मीडिया वैसे तो कांग्रेस के कार्यक्रमों को दिखाने में कोई दिलचस्पी नहीं रखता लेकिन वो इस लिये पदयात्रा को दिखा रहा है कि यात्रा के दौरान जरा भी कोई कमी हो तो तुरंत उसे नेशनल लेबल पर उसे प्रसारित किया जाये। इस यात्रा का कांग्रेस को कितना फायदा होने वाला है ये तो अगला चुनाव परिणाम ही बतायेगा। राहुल गांधी के लिये एक मौका है कि वो अपने ऊपर लगा फेल होने का धब्बा धो सकें। लेकिन भाजपा की परेशानियां बढ़ने वाली हैं ये तो तय लग रहा है। एनडीए के भाजपा ने गठबंधन सरकार बनायी थी। लेकिन यह सरकार ज्यादा दिनों तक चल नहीं हो सकी और भाजपा और पीडपी का गठबंधन टूट गया। आज के समय में मेहबूबा भाजपा को पानी पी कर कोसती हैं। आधा दर्ज घटक दल भाजपा की नीतियों से तग आ कर छिटक चुके हैं। सबसे पहले टीडीपी के चंद्र बाबू नायडू, फिर पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ जम्मू कश्मीर में भाजपा ने अपने सिद्धांतों के खिलाफ जा कर सत्ता पाने के लिये सरकार बनायी। इसके अकाली दल ने किसान आंदोलन के समर्थन में एनडीए से पल्ला झाड़ लिया। महाराष्ट्र में शिवसेना ओर भाजपा का 25 साल पुराना गठबंधन सत्ता के लालच की भेंट चढ़ गया। लेकिन सबसे ताजा मामला नितीश कुमार का है जिन्होंने एक माह पहले भाजपा की गलत नीतियों के चलते एनडीए से नाता तोड़ लिया। इन लोगों के एनडीए छोड़ने से भाजपा को भारी झटका लगने जा रहा है। इस बात से भाजपा भी इनकार नहीं कर रही है। यही वजह है कि वो अपने विपक्षियों को कैसे ठिकाने लगाये। वैसे इस काम के लिये वौ सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल बख्ूाबी आठ साल से कर रही है।
कांग्रेस की भारत जोड़ो पदयात्रा से मोदी सरकार और भाजपा की छटपटाहट साफ नजर आ रही है। आगामी आम चुनावों को लेकर भाजपा और सहयोगी दलों ने एकजुट हो कर रणनीति बनने लगी है। भाजपा और मोदी सरकार के दिग्गज नेताओं की मीटिंगों के दौर शुरू हो गयी हैं। स्वयं अमित शाह जेपी नड्डा और आरएसएस की मैराथन बैठकों में इसी बात पर चर्चा हो रही है कि देश के रुख को अपने पक्ष में कैसे किया जाये। कांग्रेस के बढ़ते कद और लोकप्रियता से भाजपा के माथे पर शिकन आना लाजिमी है। यह बात मोदी और शाह को भी पता है कि आना वाला आम चुनाव काफी कांटे का होने वाला है। अब वो पहले जैसा माहौल नहीं रहा है। जनता भी भाजपा के हर पैंतरे को समझ चुकी है। खासतौर से बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर भाजपा सरकार का यूटर्न लोगों को अखरने लगा है। वैसे भी मोदी सरकार ने गोदी मीडिया को कांग्रेस और भारत जोड़ो पदयात्रा के पीछे लगा दिया है। इनके पत्रकार कम चाटुकार कांग्रेसियों और राहुल गांधी से ऊट पटांग सवाल जवाब कर रहे हैं। उनकी पदयात्रा पर ही सवाल उठा रहे हैं। उनकी मंशा पर ही सवाल उठा रहे है।

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