26 नंवबर से पंजाब के किसानों ने खेती के तीन नये किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के लिये दिल्ली कूच का फैसला कर लिया था लेकिन मोदी सरकार ने किसानों को दिल्ली में आने से रोक दिया। हरियाणा सरकार के इशारे पर पुलिस ने बर्बरता पूर्वक लाठियां भांजीं, उन पर वाटर कैनन से ठंडी पानी की बौछार की। लेकिन केन्द्र सरकार इन सब घिनौनी हरकतों पर मुंह सिल लिया। मजबूरन भारी संख्या में किसान दिल्ली की टिकरी, सिंघू और गाजीपुर बार्डर पर ही डेरा डाल दिया है। कड़ाके की सर्दी में किसान खुले आसमान में सोने पर मजबूर हैं। अब तक 20 किसान इस आंदोलन में शहीद हो चुके हैं। लेकिन किसानों के विश्वास व इरादों में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। किसान संगठनों आंदोलन को और भी तेज करने का मन बना लिया है। इस आंदोलन में देश के कोने कोने से लोग किसानों के समर्थन में आ रहे है। समाज के हर तबके का समर्थन किसानों को मिलने लगा है। विदेशों से भी लोग भारतीय किसानों के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल हो रही है। ऐसे में मोदी सरकार ने भी किसानों से निपटने के लिये अपनी रणनीति बदल दी है। जो किसान कुछ दिनों पहले देश के अन्नदाता थे सरकार उनके लिये हितकारी कानून बनाने की कसमें खा रहे थे अब वही किसान खालिस्तानी और नक्सलवादी हो गये है। यह कहा जा रहा है कि आंदोलनकारी किसान ही नहीं हैं। बार्डर पर कांग्रेस और नक्सलवादी लोग जमा हो गये हैं। आंदोलन कर रहे किसानों पर विदेशों से फंड लेने का आरोप लगाया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा कि कनाडा से आतंकवादी संगठन खालिस्तानी से किसानों को सरकार के खिलाफ साजिश रची जा रही है।
अब सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी उठा रहे लोग सीधे सीधे जनसभाओं में किसानों को आतंकवादी बता रहे हैं। किसानों को नये फार्मिंग बिलों कोई भी दिक्कत नहीं है। कुछ संगठन विपक्षी राजनेताओं के बहकावे पर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे लोगों से सख्ती से निपटा जायेगा। ये आंदोलनकारी राष्ट्र के खिलाफ साजिश रहे हैं और मोदी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे है। मोदी सरकार ने किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिये कुछ तथाकथित किसान संगठनों का समर्थन पत्र लिया है। इसे मीडिया में काफी प्रमुखता से चलवाया जा रहा है।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार जब हमारे आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकी तो इस तरह के घटिया हरकतों पर उतर आयी है। उनकी इन घटिया हरकतों से आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। किसान मोदी सरकार को तब तक चैन से बैठने नहीं दिया जायेगा जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिया जायेगा।

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