Pluto एक हल्की-फुल्की साय-फाय कॉमेडी के रूप में शुरू होती है जिसके केंद्र में आर्थिक रूप से संघर्षरत — और दूसरों की नज़रों में 'नाकाम' — युवक का रिश्ता एक परग्रही से बनता है. निर्देशक आदित्यन चंद्रशेखर के निर्देशन में बनी यह फिल्म कथानक के कई मौकों पर पृथक विचार पेश करती है: परग्रही पात्र के पास पारंपरिक शक्तियाँ नहीं हैं, वह शराब को खाने के समान ग्रहण करता है और उसकी पृष्ठभूमि में परीक्षा में असफलता जैसी मानवीय वजहें जोड़ी गई हैं.

कहानी का केंद्र विग्नेश/विकी (नेरज माधव) और अचानक उसके जीवन में आने वाला परग्रही (अल्थफ सलीम) है, जिसे विकी 'Pluto' कहकर बुलाता है. स्थानीय गुंडे 'टाइगर' थांबी (अजू वर्गीस) की भूमिका कथानक में संघर्ष पैदा करती है क्योंकि वह परग्रही और उसके अंतरिक्ष यंत्र को हासिल करना चाहता है. फिल्म की पटकथा नीयास मुहम्मद ने लिखी है और समीक्षकों ने माना कि विचारों में ताजगी है, पर वे पर्याप्त रूप से विकसित नहीं किए गए.

समीक्षा में कहा गया है कि पटकथा कई मौकों पर बिखरी हुई लगती है: कुछ आइडियाज दिलचस्प हैं, जैसे समय को सैटिंग करके 60 सेकंड पीछे लौटाना, पर उनका बार-बार उपयोग दर्शक की जिज्ञासा घटा देता है. कॉमिक टोन बनाए रखने की कोशिश के बावजूद हास्य के वे क्षण जो सच्ची हँसी जगा सकें, कम मिलते हैं; फिल्म अक्सर अपर्याप्त उन्माद या संकोच में रहती है। इसके बावजूद अंत में भावनात्मक जुड़ाव दिखाने की कोशिश की जाती है, पर समीक्षक के अनुसार उन भावनाओं को नैसर्गिक रूप से स्थापित करने वाले पलों की कमी है.

तकनीकी पक्षों में सिनेमैटोग्राफी, संपादन और संगीत के काम को सकारात्मक रूप से देखा गया है: संपादन ने विजुअल्स को कॉमिक सजगता दी और ऑरिजिनल स्कोर ने फिल्म की ऊर्जा उठाई. अभिनय में अजू वर्गीस का प्रदर्शन नोट किया गया है जबकि मुख्य जोड़ी के प्रदर्शन के बारे में कुछ समीक्षाएँ कहती हैं कि उनकी फिजिकलिटी और चुस्तापन उस प्रकार की कार्टूनिश भूमिका के अनुरूप नहीं दिखा.

कुल मिलाकर, Pluto को समीक्षकों ने संभावनाशील पर अधूरा बताया और फिल्म को दो सितारे दिए गए।

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संदर्भ स्रोतIndian Express EntertainmentIndian Express Latest
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