1997 में मशहूर म्यूजिक कंपनी के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या के बाद मुंबई पुलिस ने संगीतकार Nadeem Saifi को इस कांड में एक प्रमुख संदिग्ध बताया। उस समय Nadeem यूके में थे और बाद में भारत वापस नहीं लौटे; भारतीय पक्ष ने उनका प्रत्यर्पण मांगा, जिसे ब्रिटिश अदालत ने खारिज कर दिया।

अदालत के निर्णय और कानूनी झڑपों के बीच Nadeem ने व्यावसायिक काम जारी रखा और कुछ बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स के लिए संगीत दिया, जिनमें Dhadkan और Kasoor शामिल हैं। इसके बावजूद उन पर यह भी आरोप लगे कि उन्होंने हत्यारों को पैसे दिए थे।

इसी पृष्ठभूमि में फिल्ममेकर Suneel Darshan की लंदन में Nadeem से मुलाकात हुई। Darshan ने कहा कि उन्होंने पहले यह जांचा कि क्या कानूनी तौर पर Nadeem के साथ काम करने पर कोई रोक है और पुलिस में पुष्टि की। पुलिसकर्मी के पास से मिली प्रतिक्रिया और Nadeem की व्यक्तिगत बातों से प्रभावित होकर Darshan ने उन्हें अपनी फिल्म Ek Rishtaa के लिए चुना।

Darshan ने यह भी बताया कि रिकॉर्डिंग के दौरान Nadeem बेहद तेज और केंद्रित काम करते थे; Ek Rishtaa के साउंडट्रैक पर वे एक ही दिन में कई गाने अंतिम रूप देने में सफल रहे। बाद में यह जोड़ी कई और फिल्मों पर साथ आई, जिनमें Haan Maine Bhi Pyaar Kiya, Jeevansathi, Barsaat, Andaaz और Dosti: Friends Forever शामिल हैं।

Nadeem ने हमेशा हत्या में अपनी कोई भूमिका न होने का दावा किया है और सार्वजनिक स्तर पर वह आरोपों का खंडन करते रहे हैं। ब्रिटिश अदालत ने भारत की प्रत्यर्पण याचिका को सही ढंग से पेश न किए जाने का हवाला देते हुए खारिज किया।

यह कहानी बॉलिवुड के उन पहलुओं को सामने लाती है जहां कानूनी उलझनों और व्यक्तिगत भरोसे के बीच व्यावसायिक संबंधों का फैसला लिया जाता है। Darshan का अनुभव यह दर्शाता है कि कुछ निर्माताओं के लिए रचनात्मक साझेदारी और तत्काल व्यावसायिक जरूरतें संदिग्धताओं के बावजूद आगे बढ़ने का कारण बन सकती हैं।

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संदर्भ स्रोतIndian Express EntertainmentTimes of India Entertainment